जाने क्या ओवैसी की AIMIM बिहार चुनाव के बाद बन जाएगी नेशनल पार्टी?

बिहार चुनाव 2020 (Bihar Polls 2020) में कुल 243 विधानसभा सीटों (Assembly Seats) में से 24 पर अपने कैंडिडेट खड़े कर रही ऑल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुस्लिमीन पार्टी को उम्मीद है कि कम से कम 10 सीटें ज़रूर जीतेगी. तेलंगाना (Telangana) के नेता और सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी बिहार चुनाव में महा लोकतांत्रिक समाजवादी फ्रंट (GDSF) का हिस्सा है, जिसमें बसपा (BSP) समेत चार और पार्टियां शामिल हैं. फिलहाल ओवैसी की पार्टी को राज्य स्तरीय यानी क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्त है, लेकिन बिहार चुनाव के बाद संभव है कि यह नेशनल पार्टी बन जाए. कैसे?

क्या आप जानते हैं कि किसी पार्टी का दर्जा किस तरह तय होता है और किन शर्तों पर कोई पार्टी नेशनल पार्टी या क्षेत्रीय कहलाती है? ओवैसी की पार्टी के संदर्भ में इस पूरे कायदे को समझना आपके लिए हर समय उपयोगी साबित हो सकता है. बिहार चुनाव में ओवैसी के गणित

अस्ल में, किशनगंज सीट पर हुए उपचुनाव में जीतने के बाद से ही ओवैसी की पार्टी MIM के हौसले बुलंद हुए. ओवैसी समेत तेलंगाना के कई नेता बिहार चुनाव में MIM उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं. पार्टी के बिहार अध्यक्ष अख्तर उल ईमान खुद अमोर सीट से प्रत्याशी हैं और जीतने की पूरी उम्मीद जता चुके हैं.

हैदराबाद के मेयर माजिद हुसैन को बिहार चुनाव के लिए पार्टी ने प्रभारी बनाया है. ओवैसी की पार्टी ने छह सीटों से द’लि’तों, ओबीसी और आदि’वा’सियों को टिकट देकर एकता का संदेश देने का दा’वा किया है तो दूसरी तरफ, खुलकर माना है कि बिहार चुनाव ल’ड़ने के पीछे पार्टी का मक’सद देशव्यापी विस्तार की दिशा में अहम कदम है. यानी, MIM नेशनल पार्टी के तौर पर उभरने की महत्वाकांक्षा रखती है. जानिए कि नेशनल पार्टी क्या होती है.

क्या होता है नेशनल पार्टी का दर्जा?

चुनाव आयोग राजनीतिक पार्टियों को तीन तरह की श्रेणियों में रखता है : नेशनल, राज्य स्तरीय और पंजीबद्ध पार्टी.

चुनाव आयोग के नज़रिये से कौन सी पार्टी किस श्रेणी में रखी जाती है, इसका ब्योरा इलेक्शन सिम्बल्स (रिज़र्वेशन एंड अलॉटमेंट) आर्डर, 1968 के तहत मिलता है. नेशनल पार्टी के दर्जे के लिए तीन खास शर्तें इस तरह हैं