महाराष्ट्र में तुग’लकी सरकार, सच देश को दिखाने वाले पत्रकारों के साथ हो रहा हैं ऐसा सुलूक

देश में कोरो’नावाय’रस के बढ़ते के”सों के बीच केंद्र और राज्य सरकारों की महा’मा’री को रोकने की कोशिशों पर लगातार सवा’ल उठ रहे हैं। इस बीच कई राज्यों ने कोरो’ना से जुड़ी गल’त खबरों के जरिए फै’ल रहे ड’र को खत्म करने के लिए प्रावधान भी बनाए हैं। पर महाराष्ट्र सरकार ने तो अपनी कमी उजागर करने वाले पत्रकारों की ही आवाजें दबानी शुरू कर दी है। अब तक 15 ऐसी घ’टनाएं सामने आ चुकी हैं, जहां महाराष्ट्र सरकार ने अपने खिला’फ खबर चलाने वाले प्रिंट, टीवी और ऑनलाइन पोर्टल के पत्रकारों पर आप’राधिक मुकद’मे दर्ज कराए हैं। वह भी लॉकडाउन के पहले महीने यानी मार्च में ही।

द वायर न्यूज वेबसाइट के मुताबिक, करीब दर्जनभर पत्रकारों को नो’टिस भेजकर जवाब भी मांगा गया है। कुछ अन्य के’सों में पत्रकारों पर मानहा’नि तक के के’स किए गए हैं, जिनमें लाखों रुपए के हर्जाने की मांग की गई। इसके अलावा एक ही रिपोर्टर या संपादक के खिला’फ एक से ज्यादा के’स भी दर्ज किए गए हैं। इन सब मामलों में जो एक बात सामान्य रही है, वह यह है कि सभी की रिपोर्ट्स राज्य में कोरोना के हाला’त पर थीं। रिपोर्टर्स का दावा है कि राज्य सरकार ने प्रशासन को पत्रकारों को निशा’ना बनाने के लिए खुली’ छूट दे रखी है।

बताया गया है कि मार्च से ही पु’लिस ने अब तक लॉकडाउन के नियम तो’ड़ने के लिए 1.3 लाख के’स द’र्ज किए हैं और करीब 28 हजार लोग जे’ल भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद राज्य में सं’क्रमितों की संख्या अब 5 लाख के करीब पहुंच चुकी है, जबकि 16,792 लोगों की जा’न भी गई है।

पत्रकारों को न्याय दिलाने की मांग के साथ सड़कों पर उतर रहे साथी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार ने एबीपी माझा के पत्रकार राहुल कुलकर्णी को अप्रैल में एक रि’पोर्ट दिखाने के लिए गि’रफ्तार कर लिया था। उनके साथ 11 अन्य रिपोर्टरों को अ’रेस्ट किया गया। सभी पर प्रवासी मजदूरों के लिए की गई ट्रेन सेवा से जुड़ी एक अ’पुष्ट फुटेज चलाने का आ’रोप लगाया गया।

इसमें दा’वा किया गया था कि बांद्रा रेलवे स्टेशन पर ट्रेन चलाए जाने की बात सुनकर तीन हजार मजदूर जुट गए। राहुल कुलकर्णी की यह सूचना दक्षिण-मध्य रेलवे के अधिकारियों की चिट्ठी पर आधरित थी। हालांकि, पुलिस ने उन पर अफवा’ह फै’लाने का आ’रोप लगाते हुए आ’ईपी’सी की पांच अलग-अलग धा’राओं के साथ एपि’डेमिक एक्ट की धारा 3 के त’हत के’स द’र्ज किया था।

इसके अलावा दिव्य मराठी अखबार के औरंगाबाद एडिशन के उपसंपादक, रिपोर्टर और फोटोग्राफर पर भी 24 और 25 जून की रिपोर्ट्स के लिए के’स हुआ था। इसमें अखबार ने प्रशासन की कमियों को उजागर किया था। हालांकि, इस मामले के बाहर आने के बाद औरंगाबाद की पत्रकार एसोसिएशन ने वि’रोध ‘द’र्ज कराया और पूरे शहर में प्रद’र्शन किया। करीब 108 रिपोर्टरों ने डिस्ट्रिक्ट कमिश्नर के घर तक मा’र्च निकाला। अब राज्य के गृह विभाग ने इस मा’मले को फिर से देखने की बात कही है।