सुधीर चौधरी ने किसान आंदोलन अब कही ये बात, जी न्यूज़ पर किसानों को बताया…

नए कृषि कानूनों के विरो’ध में किसान अपनी मांगों पर अ’ड़ें हुए हैं और लगातार आंदोलन कर रहे हैं। किसानों के इस आंदोलन को देश का एक वर्ग राजनीति से प्रेरित बता रहा है और आंदोलन कर रहे किसानों को खा’लिस्तानी कहकर संबोधित किया जा रहा है।

ज़ी न्यूज़ के एंकर सुधीर चौधरी ने अपने प्राइम टाइम शो, ‘डीएनए’ में इस मु’द्दे को लेकर कहा कि यह आंदोलन राजनीति से प्रेरित है और इस पर खालिस्तानियों का प्रभाव है। इसके बाद से उनकी ट्रोलिंग कुछ इस तरह हो रही है कि वो ट्विटर पर टॉप पर ट्रेंड कर रहे हैं।

‘सुधीर चौधरी चमचा है’ के हैशटैग से यूजर्स उनकी जब’रदस्त ट्रोलिंग कर रहे हैं। उनके शो की वीडियो क्लीपिंग शेयर कर उन्हें सत्ता का चा’टुकार बता रहे हैं। सुधीर चौधरी ने अपने शो में कहा था, ‘ट्रैक्टर को जला देना, ट्रैक्टर को गाड़ियों से खीं’चना, आंदोलन पर अंग्रेज़ी में प्रेस नोट जारी करना, अखबारों में विज्ञापन निकालना, सोशल मीडिया पर हैशटैग ट्रेंड करवाना ये सब गरीब किसान सिर्फ अपनी ताकत के द’म पर कर ही नहीं सकता।

गरीब किसान को ये समझ में ही नहीं आएगा कि वो अपने आं’दोलन को लेकर है’शटैग कैसे बनाए और उसे कैसे ट्रेंड करवाए, वो नहीं जानता कि मीडिया में हेडलाइन कैसे बनानी है।’

सुधीर चौधरी ने आगे कहा, ‘इन सबके पीछे एक राजनीतिक दिमाग है। इस आंदोलन को राजनीतिक पार्टियों ने टेक ओवर कर लिया है। इसका सबसे ज़्यादा फ़ायदा कांग्रेस, अकाली दल और आम आदमी पार्टी को हो रहा है और अब इसमें खा’लिस्तान जैसे आतं’कवादी संगठनों की भी एंट्री हो चुकी है।’

उनके इस शो के क्लिप्स वा’यरल होने के बाद ट्विटर पर यूजर्स उन्हें हर तरीके से ट्रोल कर रहे हैं। सैय्यद फाजिल नाम के एक यूज़र ने लिखा, ‘ये चमचा नहीं सर्टिफिकेटेड अंधभक्त हैं जो मोदी को गुजरात दं’गों से पहले फॉलो करते हैं और पसंद करते हैं। ये सबसे ज़्यादा बीजेपी का पक्ष लेते हैं।’

राजेंद्र कटारा नाम के एक यूज़र लिखते हैं, ‘जिस चमचे को 2000 के नोट में चिप ढूंढा था आज वो किसानों में खा’लिस्तानियों को ढूंढ रहा है।’ विशाल दोषी नाम के एक यूज़र लिखते हैं, ‘अगर ये निह’त्थे किसान आपको आतं’कवादी दिखते हैं तब आपके फे’क न्यूज को देखने का कोई मतलब नहीं बनता है।’

प्रसिद्ध पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने भी सुधीर चौधरी के इस शो पर तं’ज क’सा और कहा कि सुधीर चौधरी को पत्रकारिता छोड़ बीजेपी के आईटी सेल को ज्वॉइन कर लेना चाहिए।