सोनिया गांधी का मोदी से सवाल: ‘क्या आज देश में लिखने, बोलने, सवाल पूछने की आजादी है?

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने (Sonia Gandhi) स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) के अवसर शनिवार को लोगों को शुभकामनाएं देने के साथ ही केंद्र सरकार पर निशा’ना सा’धा और आ’रोप लगाया कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह सरकार प्रजा’तांत्रिक व्यवस्था, संवैधानिक मूल्यों एवं स्थापित परंपराओं के वि’परीत खड़ी है.

सोनिया ने इस बात पर जोर दिया, ‘‘आज हर देशवासी को अंतरात्मा में झां’क कर यह सोचने की आवश्यकता है कि आज़ादी के क्या मायने हैं? क्या आज देश में लिखने, बोलने, सवाल पूछने, असहमत होने, विचार रखने, जबाबदेही मांगने की आज़ादी है?” उन्होंने कहा कि एक ज़िम्मेदार वि’पक्ष होने के नाते ये ‘‘हमारा उत्तरदायित्व है कि हम भारत की प्रजातांत्रिक स्वाधीनता को अक्षुण्ण बनाये रखने का हरसंभव प्रयत्न व संघ’र्ष करें.”

उन्होंने लद्दा’ख में वास्त’विक नियं’त्रण रेखा (एलए’सी) पर शही’द हुए 20 जवानों पर को याद करते हुए कहा कि भारतीय भूभाग की रक्षा करना और ची’नी घु’स’पैठ को वि’फल करना ही इन शहीदों को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी. सोनिया ने स्वतंत्रता दिवस पर जारी शुभकमाना संदेश में कहा, ‘‘सभी को 74वें स्वाधीनता दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाएं. भारतवर्ष की ख्याति विश्व भर में न सिर्फ प्रजातांत्रिक मूल्यों और विभिन्न भाषा, धर्म, संप्रदाय के बहुलतावाद की वजह से है, अपितु भारत प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना एकजुटता के साथ करने के लिए भी जाना जाता है.”

उनके मुताबिक, ‘‘आज जब समूचा विश्व कोरो’ना महामा’री की महाविभी’षिका से जू’झ रहा है, तब भारत को एकजुट होकर इस महामा’री को प’रास्त करने के प्रतिमान स्थापित करने होंगे और मैं पूरे आत्मविश्वास से कह सकती हूं कि हम सब मिलकर इस म’हामा’री व गं’भीर आर्थिक संक’ट की दशा से बाहर आ जाएंगे.” कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, ‘‘हमने आजादी के बाद अपने प्रजातांत्रिक मूल्यों को सम’य समय पर परीक्षा की कसौटी पर परखा है और उसे निरन्तर परिपक्व किया है.”

उन्होंने आ’रोप लगाया, ‘‘आज ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार प्रजातांत्रिक व्यवस्था, संवैधानिक मूल्यों व स्थापित परंपराओं के विप’रीत खड़ी है. भारतीय लोकतंत्र के लिए भी ये परीक्षा की घड़ी है.” सोनिया ने पूर्वी लद्दा’ख में कुछ सप्ताह पहले श’हीद हुए जवानों को याद करते हुए कहा, ‘‘आज कर्नल संतोष बाबू समेत हमारे 20 जवानों की गलवान घाटी में वीरगति को भी साठ दिन बीत चुके हैं.

मैं उनको भी याद कर उनकी वीरता को नमन करती हूं व सरकार से आग्रह करती हूं की उनकी वीरता का स्मरण करे व उचित सम्मान दे.” उन्होंने कहा, ‘‘भारत मां की सरज़मी की रक्षा व ची’नी घुसपैठ को विफ’ल करना इन शहीदों को सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी.”