शाहीनबाग पर सुप्रीम को’र्ट का बड़ा फैसला, पब्लिक प्लेस पर अनिश्चितकाल तक नहीं हो सकता प्र’दर्शन

शाही’न बाग में C’AA विरो’ध प्र’दर्शन के नाम पर सड़क रोके जाने को सुप्री’म को’र्ट ने गलत कहा है. को’र्ट ने कहा है कि इस मा’मले में प्रशा’सन को कार्र’वाई करनी चाहिए थी, जो उसने नहीं की. को’र्ट ने यह भी उम्मीद जताई है कि भविष्य में ऐसी स्थिति नहीं बनेगी.

विरो’ध के अधिकार की सीमा

शाही’न बाग से प्र’दर्शनकारियों को हटाए जाने के करीब 7 महीने बाद दिए फैसले में को’र्ट ने कहा है कि नाग’रिकता संशो’धन का’नून के समर्थन और विरो’ध में लोगों के विचार हैं. आज के दौर में सोश’ल मी’डिया पर होने वाली च’र्चा से भी भावनाएं और तेज़ होती हैं. विरो’ध करने वालों ने प्र’दर्शन के ज़रिए अपनी बात रखी. लेकिन एक अहम सड़क को लंबे अरसे तक रोक देना सही नहीं था.

जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा है, “सं’विधान के अनु’च्छेद 19 1(a) के तहत अपनी बात कहना और 19 1(b) के तह’त किसी मसले पर शांतिपूर्ण विरो’ध करना लोगों का संवै’धानिक हक है. लेकिन इस अधिकार की सीमाएं हैं. सार्वजनिक जगह को अनिश्चितत काल तक नहीं घे’रा जा सकता. दूसरे लोगों के आने-जाने को बाधित नहीं किया जा सकता. ऐसी स्थिति में प्रशासन को कार्र’वाई करनी चाहिए. इस मा’मले में भी कार्र’वाई होनी चाहिए थी. लेकिन ऐसा नहीं किया गया.”

क्या है मा’मला

दिल्ली के शाही’न बाग में नाग’रिकता सं’शो’धन का’नून के खिला’फ करीब 100 दिनों तक लोग सड़क रोक कर बैठे थे. दिल्ली को नोएडा और फरीदाबाद से जोड़ने वाले एक अहम रास्ते को रोक दिए जाने से रोज़ाना लाखों लोगों को परे’शानी हो रही थी. इसके खिला’फ वकील अमित साहनी और बीजेपी नेता नंदकिशोर गर्ग ने सुप्रीम को’र्ट में याचिका दाखिल की थी.

को’र्ट ने पुलिस को भी’ड़ पर कार्र’वाई का निर्देश देने की बजाय लोगों को समझा कर हटा’ना उचित समझा. इस काम के लिए 2 वार्ताकार संजय हेगड़े और साधना रामचंद्रन को नियुक्त कर दिया. इस बीच कोरो’ना के चलते को’र्ट का सामान्य कामकाज बा’धित हो गया.

आखिरकार 21 सितंबर को मा’मला जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने लगा. उस दिन सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने जजों को बताया कि लॉक’डाउन लागू होने के बाद प्र’दर्श’कारियों को सड़क से ह’टा दिया गया था. इस जानकारी के बाद को’र्ट ने मा’मले पर आगे सुनवाई को गै’रज़रूरी माना.

याचिकाकर्ताओं ने को’र्ट से अनुरोध किया गया कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचाव के लिए वह कुछ निर्देश दें. जजों ने भी माना कि लोकतंत्र में विरो’ध प्र’दर्शन के अधिकार और लोगों के ‘मुक्त आवागमन के अधिकार में संतुलन को लेकर स्पष्टता की ज़रूरत है. अब यह आदेश आया है.

को’र्ट के पीछे न छुपें

मा’मले की सुनवाई के दौरान दिल्ली पु’लिस ने को’र्ट से प्र’दर्शनकारियों पर कार्र’वाई की इजाज़त मांगी थी. उस पर टि’प्पणी करते हुए को’र्ट ने कहा है, “हमारा काम किसी कार्र’वाई की वै’धता तय करना है. प्रशासन को कार्र’वाई करनी चाहिए. इसके लिए हमारा सहारा नहीं लेना चाहिए. अगर इस मा’मले में कार्र’वाई की गई होती तो याचिकाकर्ताओं को यहां आने की ज़रूरत ही नहीं पड़ती.“