शोधकर्ताओं की रिपोर्ट : कोरोना संकट से आधी दुनिया होगी कं’गाल, भारत का होगा ये हाल ….

कोरोना वायरस का कहर लोगों की आर्थिक स्‍थिति पर भी पड़ा है। कोरोना के कारण दुनिया के कई देश लंबे समय से लॉकडाउन से जूझ रहे हैं, जिसके बाद यहां पर मजदूरों की आर्थिक हालत काफी खराब हो गई है। हाल ही में जारी किए गए एक रिसर्च के अनुसार, कोरोना संकट के कारण दुनिया में गरीबों की तादाद में भारी इजाफा देखने को मिलेगा।

शोधकर्ताओं ने शुक्रवार को एक रिपोर्ट में कहा कि कोरोनो वायरस महामारी से आर्थिक गिरावट के कारण 395 मिलियन लोग अत्यधिक गरीब हो जाएंगे। दुनिया भर में ऐसे लोगों को प्रतिदिन 1.90 डॉलर से कम की रकम पर जीवन यापन करने को मजबूर होना पड़ेगा।

रिपोर्ट UNU-WIDER द्वारा प्रकाशित की गई है जोकि संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय का हिस्सा है। इसमें कई परिदृश्यों को ध्‍यान में खेला गया है। जिसमें विश्व बैंक की विभिन्न गरीबी रेखाओं को ध्यान में रखते हुए- अत्यधिक गरीब प्रति दिन 1.90 डॉलर या उससे कम पर और उच्चतर एक दिन में 5.50 डॉलर या उससे से कम पर, परिभाषित किया गया है।

सबसे खराब परिदृश्य के तहत प्रति व्यक्ति आय या खपत में 20% की कमी देखी गई है। जिसमें अत्यधिक गरीबी की संख्या 1.12 बिलियन हो सकती है। उच्च-मध्यम आय वाले देशों में 5.50 डॉलर की सीमा लागू की गई है, जहां पर यह 3.7 बिलियन से अधिक हो सकती है। इसमें दुनिया की आधी से अधिक आबादी को गरीबी रेखा से नीचे रखा गया है।

रिपोर्ट लेखकों में से एक एंडी सुमनेर ने कहा, “दुनिया के सबसे गरीब लोगों के लिए दृष्टिकोण गंभीर है जबतक कि सरकारें गरीबों की आय को बढ़ाने के लिए जल्द से जल्द कुछ ठोस कदम नहीं उठाती हैं।”

जिसका नतीजा यह होगा कि गरीबी एक बार फिर 20-30 साल बाद वापस कर सकती है और गरीबी को खत्म करने का संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य एक सपने जैसा है।”

किंग्स कॉलेज लंदन और ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि गरीबी भौगोलिक स्‍तर पर में बदल जाएगी। अत्यधिक गरीबी में डूबने के जोखिम वाले लोगों की सबसे बड़ी संख्या दक्षिण एशिया में देखने की उम्मीद है, जो मुख्य रूप से आबादी के हिसाब से भारत है। इसके बाद उप-सहारा अफ्रीका था, जहां गरीबी में लगभग एक तिहाई वृद्धि होगी।

इससे पहले सोमवार को विश्व बैंक ने कहा था कि कोरोना महामरी से 70-100 मिलियन लोगों के अत्यधिक गरीब होने की कगार पर पहुंचने की उम्मीद है।