राज्यसभा में मोदी सरकार का बड़ा बयान- देशभर में NRC कराने पर लिखित में दी ये जानकारी

केंद्र की मोदी सरकार ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि उसने राष्ट्रीय ना’गरिकता पं’जी (एनआरसी) को देशव्यापी स्तर पर शुरु करने का कोई फैसला नहीं किया है। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में एक सवा’ल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी।

उन्होंने एक लिखित जवाब में बताया कि नागरिकता कानू’न 1955 के तहत नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजनशिप के तहत डिटेंशन सेंटर का कोई प्रा’वधान नहीं है। उन्होंने बताया कि असम में बने डिटेंशन सेंटर में 802 लोग रखे गए हैं। एक अन्य जवाब में उन्होंने बताया कि पिछले पांच सालों में सरकार ने 14,864 बांग्लादेशी लोगों को नागरिकता दी है। यह नागरिकता 2015 में दोनों देशों की सरकारों के मध्य हुए सीमा समझौते के बाद प्रदान की गई।

उन्होंने कहा कि 28 फरवरी, 2012 को उच्चतम न्यायालय ने निर्देश दिया था कि अपनी सजा पूरी करने वाले विदेशी नागरिकों को तुरंत जेल से रिहा कर दिया जाएगा और उनका निर्वासन या प्रत्यर्पण होने तक उन्हें सीमित आवाजाही के साथ उचित स्थान पर रखा जाएगा।

राय ने कहा कि उस निर्देश के बाद, गृह मंत्रालय ने सात मार्च, 2012 को राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन को उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन करने के लिए निर्देश जारी किए।

मंत्री ने कहा कि अवै’ध प्रवासियों और वि’देशियों को हिरासत में लेने के लिए उनकी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा निरुद्ध केंद्र स्थापित किए जाते हैं। वे अवै’ध प्रवासी या विदेशी होते हैं जिनकी सजा पूरी हो चुकी हो और जिनका निर्वासन या प्रत्यपर्ण समुचित यात्रा दस्तावेजों के अभाव में लंबित हो।

बता दें कि उच्चतम न्यायालय की नि’गरानी में एनआरसी को अस’म में अपडेट किया गया था। जब 31 अगस्त, 2019 को अंतिम एनआरसी प्रकाशित किया गया था, तो कुल 3,30,27,661 आवेदकों में से 19.06 लाख लोगों को बाहर कर दिया गया था, जिससे पूरे भारत में एक वि’वाद सी स्थिति बन गई थी।