रिपोर्ट: प्रेस की आज़ादी छिनने वालों में मोदी का नाम, किम जैसे तानाशाह के साथ मिला PM को ये स्थान !

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन 37 राष्ट्राध्यक्षों या सरकार के प्रमुखों की सूची में शामिल हो गए हैं, जिन्हें वैश्विक निकाय रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) ने प्रेस स्वतंत्रता को नियंत्रण करने वालों (प्रीडेटर्स) के रूप में पहचाना है.

मोदी के (इस सूची में) प्रवेश से पता चलता है कि कैसे विशाल मीडिया साम्राज्य के मालिक अरबपति व्यवसायियों के साथ उनके घनिष्ठ संबंध ने उनके बेहद विभाजनकारी और अपमा’नजनक भाषणों के निरंतर कवरेज के माध्यम से उनकी राष्ट्रवादी-लोकलुभावन विचारधारा को फै’लाने में मदद की है.

मोदी पाकिस्तान के इमरान खान, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, म्यांमार के सैन्य प्रमुख मिन आंग हलिंग और उत्तर कोरिया के किम जोंग-उन के साथ-साथ 32 अन्य लोगों में शामिल हो गए हैं, जिनके बारे में कहा गया है कि वे ‘सेंसरशिप तंत्र बनाकर प्रेस की स्वतंत्रता को रौं’दते हैं, पत्रकारों को मनमाने ढं’ग से जेल में डालते हैं या उनके खि’लाफ हिं’सा भ’ड़काते हैं. उनके हाथों पर खू’न नहीं है क्योंकि उन्होंने प्रत्यक्ष या अप्र’त्यक्ष रूप से पत्रकारों को ह’त्या की ओर ढ’केला है.’

2016 के बाद यह पहला मौका है जब आरएसएफ इस तरह की सूची प्रकाशित कर रहा है. ‘प्रीडेटर्स’ के रूप में पहचाने जाने वाले प्रमुखों में से सत्रह नए प्रवेशकर्ता हैं. सूची में शामिल 37 में से 13 एशिया-प्रशांत क्षेत्र से हैं.

सूची के सात वैश्विक नेता साल 2001 में पहली बार प्रकाशित होने के बाद से ही इसका हिस्सा रहे हैं और इसमें सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद, ईरान के अली खामेनेई, रूस के व्लादिमीर पुतिन और बेलारूस के अलेक्जेंडर लुकाशेंको शामिल हैं.

आलोचक और पत्रकार रोमन प्रोटासेविच को पक’ड़ने के लिए एक विमान का नाटकीय रूप से मार्ग बदलने के बाद से अलेक्जेंडर लुकाशेंको ने एक ‘प्रीडेटर’ के रूप में पहचान हासिल की है.

बांग्लादेश की शेख हसीना और हांगकांग की कैरी लैम दो ऐसी महिला राष्ट्र प्रमुख हैं, जिनकी पहचान ‘प्रीडेटर्स’ के रूप में की गई है.आरएसएफ के प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रत्येक प्रीडेटर्स के लिए आरएसएफ ने उनकी ‘प्रीडेटर पद्धति’ की पहचान करते हुए एक फ़ाइल संकलित की है.

सूची इस बात पर भी प्रकाश डालती है कि कैसे प्रत्येक ‘प्रीडेटर’ पत्रकारों को सें’सर करता है और उनका उ’त्पीड़न करता है. इसके साथ ही वे किस प्रकार के पत्रकार और मीडिया आउटलेट को पसंद करते हैं, साथ ही भाषणों या साक्षात्कारों के उद्धरण जिसमें वे अपने हिंसक व्यवहार को उचित ठहराते हैं.

मोदी के बारे में कहा गया है कि वह 26 मई, 2014 को पदभार ग्रहण करने के बाद से एक प्रीडेटर रहे हैं और अपने तरीकों को ‘राष्ट्रीय लोकलुभावनवाद और दुष्प्रचार’ के रूप में सूचीबद्ध करते हैं.

आरएसएफ कहता है, ‘उनके पसंदीदा लक्ष्य ‘सिकुलर’ और ‘प्रेस्टीट्यूट्स’ हैं. पहला एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल हिं’दू दक्षिणपंथी और मोदी की भारतीय जनता पार्टी के समर्थक ‘धर्मनि’रपेक्ष’ दृष्टिकोणों की आलोचना करने के लिए करते हैं.

मोदी को अब केवल उन मीडिया आउटलेट्स और पत्रकारों को बेअसर करना है जो उनके विभाजनकारी तरीकों पर सवाल उठाते हैं.इसके लिए उसके पास न्यायिक शस्त्रागार है जिसमें ऐसे प्रावधान हैं जो प्रेस की स्वतंत्रता के लिए एक बड़ा ख’तरा पै’दा करते हैं. उदाहरण के लिए, पत्रकार राजद्रो’ह के बेहद अस्पष्ट आरो’प के तहत आजीवन कारा’वास के ख’तरे को उठाते हैं.

एक नियम के रूप में कोई भी पत्रकार या मीडिया आउटलेट जो प्रधानमंत्री की राष्ट्रीय-लोकलुभावन विचारधारा पर सवाल उठाते हैं, उन्हें जल्दी से ‘सिकुलर’ (बीमार और ध’र्मनिरपेक्ष शब्द का एक मिश्रण) के रूप में ब्रांडेड किया जाता है.इसके साथ ही ऐसे उन्हें भक्तों द्वारा नि’शाना बनाया जाता है, जो उन पर मु’कदमे दायर करते हैं, मुख्यधारा के मीडिया में उन्हें ब’दनाम करते हैं और उनके खि’लाफ ऑनलाइन ह’मलों का समन्वय करते हैं.

हा’ल ही में आरएसएफ ने द वायर, ट्विटर इंडिया, पत्रकार राणा अय्यूब, सबा नकवी और मोहम्मद जुबैर के खि’लाफ गाजियाबाद में एक मु’स्लिम बुजुर्ग के खि’लाफ ह’मले पर ट्वीट और रिपोर्ट के संबंध में आप’राधिक सा’जिश के बेतुके आरोपों’ की आलोचना की थी.