बिहार में नीतीश कुमार या तेजस्वी यादव, कौन मारेगा बाजी? जानें किसे मिल सकती हैं कितनी सीटें

बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए 71 विधानसभा सीटों पर पहले चरण का मतदान 28 अक्टूबर को होगा. बिहार में आरजेडी के नेतृत्व वाले महागठबंधन में कांग्रेस और वामपंथी दल मिलकर चुनाव मैदान में है. ऐसे में आरजेडी का अधिकांश सीटों पर जेडीयू से मुकाबला है.

बिहार के चुनाव में खुद प्रधानमंत्री भी प्रचार के लिए उतर चुके हैं. वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी भी तेजस्वी यादव के साथ चुनावी रथ पर सवाल हो चुके हैं. बिहार एनडीए में बगावत करने वाले चिराग पासवान भी सीएम नीतीश कुमार पर निशाना साध रहे हैं.

इस बेहद रोचक चुनाव से पहले सभी के मन में एक ही सवाल है कि आखिर बिहार की सत्ता पर कौन काबिज होगा? पहले चरण की वोटिंग से पहले न्यूज ने लोगों का मन टटोला है. न्यूज अपने पाठकों और दर्शकों के लिए ओपिनियन पोल लेकर आया है.

क्या कहता है सीमांचल का मूड

सीमांचल इलाके में कुल 24 सीटें हैं, अभी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमांचल और मिथांलचल को जोड़ने वाले रेल पुल का उद्घाटन किया था. सीमांचल क्षेत्र के प्रमुख जिलों की बात करें तो पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार हैं.

सी वोटर के ओपिनियन पोल के मुताबिक नीतीश+ को 28 %, लालू + को 46 % वोट, पासवान को 4 % वोट और अन्य के खाते में 22% वोट जा सकता हैं. सीटों की बात करें तो नीतीश+ के खाते में 11-15 सीट, लालू+ के खाते में 8-11 सीट और अन्य के खाते में 1-1 सीट जा सकती है. चिराग पासवान की पार्टी का वोट प्रतिशत सीटों में बदलता नहीं दिख रहा. यहां एलजेपी का खाता नहीं खुल रहा है.

क्या है अंग प्रदेश का मूड?

बिहार के अंग प्रदेश में कुल 27 सीटें हैं, प्रमुख जिलों की बात करें तो भागलपुर, बांका, मुंगेर, जमुई. खगड़िया, लखीसराय और शेखपुरा हैं. अंग प्रदेश में ही मंदार पर्वत है, जिसका इस्तेमाल देवताओं और राक्षसों के बीच हुए समुद्र मंथन में हुआ था.

सी वोटर के ओपिनियन पोल के मुताबिक अंग प्रदेश में नीतीश+ को 47%, लालू + को 29%, पासवान को 4 % वोट मिल सकते हैं. बाकी का 20% वोट अन्य के खाते में जा सकता है. अंग्र प्रदेश की सीटों की बात करें तो नीतीश+ को 16-20 सीट, लालू + को 6-10 सीट मिल सकती हैं. वहीं एलजेपी यहां 0 से 2 सीट के बीच झूलती नजर आ रही है. एक सीट अन्य के खाते में भी जा सकती है.

क्या कहता है मिथिलांचल की जनता का मूड?

मिथिला पेंटिंग के लिए दुनिया भर में मशहूर मिथिलांचल में कुल 50 सीटें हैं, इसके प्रमुख जिलों की बात करें तो दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल और बेगूसराय हैं. -सी वोटर ओपिनियन पोल के मुताबिक नीतीश+ को 41%, लालू+ को 38 %, पासवान को 4 % और अन्य के हिस्से 17 % वोट शेयर जाने की संभावना है. सीटों की बात करें तो नीतीश+ 27-31 सीट, लालू + 18-21 सीट, पासवान 1-3 सीट मिल सकती हैं. वहीं एक सीट अन्य के खाते में जा सकती है.

क्या कहता है मगध की जनता का मूड?

सीटों की संख्या के हिसाब से मघध बिहार का दूसरा बड़ा क्षेत्र है. मगध क्षेत्र में कुल 69 सीट सीटें हैं. मगध में आने वाले प्रमुख जिले पटना, आरा, बक्सर, सासाराम, कैमूर, गया, औरंगाबाद, नालंदा, नवादा, जहानाबाद और अरवल हैं. कई राजनीतिक परिवर्तनों का गवाह रहा पटना का गांधी मैदान मगध क्षेत्र में ही स्थित है.

-सीवोटर के ओपिनियन पोल के मुताबिक नीतीश+ को 44%, लालू+ को 33%, पासवान को 4 % और अन्य के खाते में 19 % वोट शेयर जा सकता है. वहीं वोट प्रतिशत को सीटों में बदलें तो नीतीश+ 36-44 सीट, लालू+ 23-30 सीट, अन्य के खाते में 2 से 3 सीटें जा सकती हैं. मगध भोजपुर इलाके में चिराग पासवान की एलजेपी सीटों पर सिमटती नजर आ रही है.

क्या कहता है उत्तर बिहार क्षेत्र की जनता का मूड?

सीटों की संख्या के लिहाज के उत्तर बिहार सबसे बड़ा क्षेत्र है. इसमें कुल 73 सीटें हैं. इसमें आने वाले जिलों की बात करें तो मुजफ्फऱपुर, सीतामढ़ी. शिवहर, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, वैशाली, छपरा, सीवान और गोपालगंज हैं. सीतामढ़ी का जानकी मंदिर इसी क्षेत्र में हैं. इस मंदिर से चार किलोमीटर दूर पुनौरा में माता सीता के जन्म की मान्यता है.

-सीवोटर ओपिनियन पोल के आंकड़ों की बात करें तो नीतीश+ को 46%, लालू+ को 32%, पासवान को 3 % और अन्य के खाते में 19 % वोट शेयर जा सकता है. वहीं सीटों की बात करें तो नीतीश+ के खाते में 45-49 सीट, लालू+ के खाते में 22-26 सीट, अन्य के खाते में 1-2 सीटें जा सकती हैं. यहां चिराग पासवान की पार्टी का खाता खुलता नजर नहीं आ रहा है.

क्या कहता है बिहार की जनता का ओपिनियन पोल?

क्षेत्रवार आंकड़ों के बाद अब बारी है, पूरे बिहार के ओपिनियन पोल के आंकड़ों को जानने की. -सीवोटर ओपियिन पोल के मुताबिक बिहार की कुल 243 सीटों में वोट प्रतिशत की बात करें तो नीतीश+ के खाते में 43% वोट, लालू+ को 35 % वोट, चिराग पासवान की एलजेपी को 4% वोट और 18% वोट अन्य के खाते में जा सकता है.

सीटों की बात करें तो नीतीश की अगुवाई वाला एनडीए सबसे आगे नजर आ रहा है. नीतीश+ के खाते में 135-159 सीट, लालू+ को 77-98 सीट और एलजेपी को 1-5 सीट मिल सकती हैं. वहीं अन्य के खाते में 4 से 8 सीटें जा सकती हैं.

चिराग की वजह से एनडीए को नुकसान होगा ?

और सी वोटर के ओपिनियन पोल में हमने जनता से बिहार से जुड़े कुछ अहम सवाल पूछे. इसमें कुछ के जवाब चौंकाने वाले हैं. हमने जनता से पूछा- चिराग की वजह से एनडीए को नुकसान होगा ? इसके जवाब में 60% लोगों ने कहा कि हां वहीं 40% लोगों का कहना है कि नहीं चिराग पासवान के अलग होने से असर नहीं पड़ेगा.

क्या चिराग और बीजेपी मिले हुए हैं ?

इस सवाल के जवाब में 61% लोगों का कहना है कि हां बिहार एनडीए में जो कुछ भी हो रहा है, वो बीजेपी और चिराग पासवान की मिलीभगत है. वहीं 39% लोगों का इसके उलट मानना है. इन लोगों को लगता है कि नहीं, इस एनडीए में आई दरार के पीछे चिराग और बीजेपी की कोई मिली भगत नहीं है.

लालू के जे’ल में होने का आरजेडी को नुकसान होगा ?

बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर हुए ओपिनियन पोल में 45% जनता का मानना है कि हां, लालू प्रसाद यादव के जेल में होने का असर तेजस्वी के रिजल्ट में भी दिखेगा. वहीं 55% जनता का मानना है कि नहीं ऐसा नहीं है, लालू यादव के जेल में होने का असर आरजेडी के आंकड़ों पर नहीं दिखेगा.

चुनाव बाद तेजस्वी-चिराग एक हो सकते हैं ?

बिहार चुनाव से जुड़े एक बेहद रोचक सवाल कि क्या चुनाव के बाद तेजस्वी-चिराग एक हो सकते हैं ? इसके जवाब में 53% जनता का मानना है कि हां, ऐसा हो सकता है कि नतीजों को देखते हुए चिराग पासवान और तेजस्वी यादव हाथ मिला लें. वहीं 46% जनता को ऐसा लगता है कि नहीं चिराग-तेजस्वी ऐसा नहीं करेंगे.

किसके 15 साल बेहतर मानते हैं?

बिहार में चुनाव प्रचार के दौरान 15 साल बनाम 15 साल का मुद्दा पीरे जोर शोर से हावी है. नीतीश लालू यादव के 15 साल की विरासत को दोष दे रहे हैं. वहीं तेजस्वी और बाकी विपक्ष नीतीश-बीजेपी के 15 साल का हिसाब मांग रहा है. जनता की बात करें तो यहां मामला नीतीश कुमार के पक्ष में जाता नजर आ रहा है. 62% जनता का मानना है कि नीतीश कुमार के 15 लालू यादव के 15 साल पर भारी हैं. वहीं 38% जनता का मानना है कि लालू-राबड़ी के 15 साल बेहतर थे.

बीजेपी को ज्यादा सीट मिली तो सीएम पर नीतीश से झगड़ा होगा ?

एक और महत्वपूर्ण सवाल- बीजेपी को ज्यादा सीट मिली तो सीएम पर नीतीश से झगड़ा होगा ? इस सवाल के जवाब में 61% लोगों का कहना है कि हां, ऐसा हो सकता है. बीजेपी ज्यादा सीटें आने पर अपना मुख्यमंत्री बनाने की शर्त रख दे. वहीं 39% लोगों का ऐसा नहीं सोचते, इनके मुताबिक बीजेपी की ज्यादा सीटें आएं या कम मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही बनेंगे.

सबसे बड़ा मुद्दा क्या है?

बिहार में इस बार चुनाव मुद्दों पर आ गया है, इसलिए मुद्दे से जुड़ा सवाल भी जनता से पूछा गया कि सबसे बड़ा मुद्दा क्या है? इस पर 52% लोगों का मानना है कि बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा है. वहीं  भ्रष्टाचार 11% के लिए, सड़क-बिजली 10% के लिए और शिक्षा 8% के लिए सबसे बड़ा मुद्दा है.

नीतीश के काम को कैसा मानते हैं ?

15 साल से बिहार की सत्ता पर का’बिज नीतीश कुमार के कामकाज को लेकर ओपिनियन पोल में जनता से सवाल पूछा गया. इस 25% लोगों ने नीतीश के ‘सुशासन’ को अच्छा बताया. वहीं 28% लोगों ने नीतीश के काम को औसत माना. वहीं 46% लोगों ने नीतीश के काम काज को सिरे से खा’रिज कर दिया.

सीएम की पसंद कौन ?

मुद्दे के साथ बिहार में चेहरों की भी ल’ड़ाई है, इसलिए ओपिनियन पोल में मुख्यमंत्री की पसंद को लेकर भी सवाल पूछा गया, नीतीश कुमार पर 30 %, तेजस्वी यादव पर 20 %, चिराग पासवान पर 14% तो मौजूदा डिप्टी सीएम सुशील मोदी पर सिर्फ 10% लोगों ने भरोसा जताया. यानी चेहरों की ल’ड़ाई में नीतीश कुमार अपने बाकी सभी प्रतिद्वंदियों से कई कदम आगे खड़े हैं.

क्या नीतीश से नाराज हैं ?

ओपिनियन पोल में मुख्यमंत्री से लोंगों की नाराजगी को लेकर भी सवाल पूछा गया. इस सवाल के जवाब में जो आंकड़े आए हैं वो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की टेंशन बढ़ा सकते हैं. 60 % लोगों ने कहा कि नीतीश कुमार से नाराज हैं और मुख्यमंत्री बदलना चाहते हैं. वहीं 26% लोगों ने कहा कि हम नाराज तो हैं लेकिन बदलना नहीं चाहते, एक बार फिर नीतीश पर ही भरोसा जताना चाहते हैं. वहीं सिर्फ 14% लोग ऐसे हैं जो न नाराज हैं और न ही नीतीश को बदलना चाहते हैं.

ओपिनियन पोल से जुड़ी जरूरी जानकारी- 28 अक्टूबर को बिहार में पहले फेज की वोटिंग है. ABP न्यूज के सी वोटर ने फाइनल ओपिनियन पोल किया है. बिहार की सभी 243 सीटों पर 30 हजार 678 लोगों से बात की गई है. सर्वे 1 अक्टूबर से लेकर 23 अक्टूबर के बीच किया गया है.