मोदी काल में एक बार भी आया किसान आय डेटा, नहीं है इनकी आमदनी का कोई होश

आर्थिक सर्वे के चेप्टर सात में खेती किसानी के बारे में जो बात कही गई है उसके मुताबिक 2014-15 में राष्ट्रीय आमदनी में खेती का योगदान 18.2 फीसदी था, जो 2019-20 में गिरकर 16.5 फीसदी रह गया है। 2014-15 से लेकर आजतक देखें तो खेती में विकास दर पहले की तरह नहीं है। 2016-17 में खेती की अधिकतम विकास दर 6.3 फीसदी की दर्ज हुई थी, जो 2019-20 में गिरकर 2.8 फीसदी रह गई।

किसानों की आय कितनी है इसका नया डेटा नहीं है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 2015-16 के बाद किसानों की औसत आय का डेटा आना बंद हो गया है। साल 2019 में राज्यसभा में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तौमर ने बताया था कि हरियाणा के किसानों की कमाई सबसे अधिक है। उनकी एक महीने की कमाई 14,434 रुपए है।

आर्थिक सर्वे के मुताबिक विश्व कृषि व्यापार में भारत का योगदान लगभग 2.15% है। भारतीय कृषि निर्यात के मुख्य भागीदारों में संयुक्त राज्य अमेरिका, सऊदी अरब, ईरान, नेपाल और बांग्लादेश शामिल हैं। साल 1991 से आर्थिक सुधारों की शुरुआत से भारत कृषि उत्पादों के निर्यात को निरंतर बनाए हुए है जिसने निर्यात द्वारा 2.7 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े को प्राप्त कर लिया है तथा वर्ष 2018-19 में 1.37 लाख करोड़ रुपए का आयात किया है।

केंद्र सरकार के हाल ही में लाए गए तीन विधेयकों का किसान बड़े पैमाने पर विरो’ध कर रहे हैं। सरकार इन विधेयकों को किसान हि’तैषी बता रही है जबकि किसानों का कहना है कि इनसे किसानों का नु’कसान होगा। किसानों को आ’शं’का है कि उन्हें अपनी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं मिल सकेगा। सरकार एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य के प्रति प्रतिबद्ध है लेकिन ये कभी भी का’नून का हिस्सा नहीं रहा है। विप’क्षी पार्टियों पर निशा’ना सा’धते हुए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जब वो स’त्ता में थे तब उन्होंने इस पर का’नून क्यों नहीं बनाया।