बड़ी ख़बर: केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को राज्यसभा में दिया ये पद

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को राज्यसभा का उप नेता नियुक्त किया गया है। सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। माना जाता है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता नकवी संसदीय मा’मलों पर अच्छी पक’ड़ रखते हैं। वह विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ अच्छे संबंध एवं समन्वय के लिए भी जाने जाते हैं।

इससे पहले उच्च सदन में उप नेता की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल के पास थी जिन्हें पिछले दिनों राज्यसभा का नया नेता नियुक्त किया गया है। गोयल से पहले थावर चंद गहलोत नेता सदन थे। हालांकि मंत्रिपरिषद विस्तार से ठीक पहले उन्हें कर्नाटक का राज्यपाल नियुक्त किया गया। 64 वर्षीय मुख्तार अब्बास नकवी राजनाथ सिंह के बाद दूसरे ऐसे नेता हैं, जो अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में भी मंत्री थे, और हालिया कैबिनेट फे’रबदल के बाद भी नरेंद्र मोदी की टीम में शामिल होने में कामयाब रहे हैं।

नकवी की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब विपक्ष COVID-19, ईंधन की कीमतों में वृद्धि और किसानों आं’दोलन समेत कई मु’द्दों पर सत्तारूढ़ दल को घे’रने के लिए तैयार है।एक नजर पॉलिटिकल करियर पर: नकवी को 17 साल की उम्र में आपातकाल के दौरान महाराष्ट्र के नैनी सेंट्रल जेल में उनकी राजनीतिक गतिविधियों के चलते बं’द कर दिया गया था। एक छात्र नेता के रूप में, उन्होंने जनता पार्टी की गतिविधियों में भी भा’ग लिया था।

नकवी ने 1980 में जनता पार्टी (सेक्युलर) के उम्मीदवार के रूप में उत्तर प्रदेश की विधान सभा के लिए चुनाव ल’ड़ा था लेकिन सफन नहीं हो सके थे। उन्होंने 1980 के लोकसभा चु’नाव में अयोध्या सीट से एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में भी चु’नाव ल’ड़ा। हालांकि वह 1998 में लोकसभा के लिए चुने गए, और बाद में उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्रालय में राज्य मंत्री का पद दिया गया।

वह 26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी सरकार में अल्पसंख्यक मा’मलों और संसदीय मा’मलों के राज्य मंत्री बने। वह 2016 में राज्यसभा के लिए चुने गए थे। 12 जुलाई 2016 को नजमा हेपतुल्ला के इस्तीफे के बाद, उन्हें अल्पसंख्यक मा’मलों के मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार मिला था।उन्होंने 30 मई 2019 को नरेंद्र मोदी के कैबिनेट में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली और अल्पसंख्यक मा’मलों के मंत्रालय के साथ बने रहे।