बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी को बड़ी राहत, मगर दोनों बेटों की मु’श्किलें बढ़ीं

मुख्तार अंसारी को एमपीएमएलए की विशेष अदालत से बड़ी राहत मिली है। जेलर से गा’ली गलौज व जा’नमाल की ध’मकी देने और तत्कालीन अपर महानिरीक्षक कारागार को धम’की देने के एक दूसरे मा’मले में साक्ष्य के अभाव में मुख्तार अंसारी को बरी कर दिया है। विशेष अदालत ने थाना हजरतगंज से संबधित गैं’गस्टर के भी एक मा’मले में भी साक्ष्य के अभाव में अभियुक्त मुख्तार को बरी करने का आदेश दिया है।

वहीं मुख्तार अंसारी के दोनों बेटों अब्बास अंसारी व उमर अंसारी की मु’श्किलें बढ़ गई हैं। गाजीपुर में गजल होटल खरीद फरो’ख्त में फ’र्जीवाड़े के मा’मले में दोनों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी गई है। इसी मा’मले में सह आरो’पी सादिक हुसैन की जमानत अर्जी को भी नामंजूर कर दिया गया है।

28 अप्रैल, 2003 को लखनऊ के जेलर एसके अवस्थी ने थाना आलमबाग में मुख्तार के खि’लाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसके मुताबिक जेल में मुख्तार अंसारी से मिलने आए लोगों की तलाशी लेने का आदेश देने पर उन्हें जान से मा’रने की ध’मकी दी गई थी। साथ ही उनके साथ गा’ली ग’लौज करते हुए मुख्तार ने उन पर पिस्तौ’ल भी ता’न दी थी। जबकि एक मार्च, 1999 को तत्कालीन अपर महानिरीक्षक कारागार एसपी सिंह पुंढीर ने थाना कृष्णानगर में दर्ज कराई थी। विशेष अदालत में मुख्तार अंसारी के इन दोनों मा’मलों के अलावा थाना हजरगंज से संबधित गैं’गस्टर एक्ट के मु’कदमे की भी सुनवाई हो रही थी।

बेटों की अग्रिम ज’मानत याचिका खारिज

गाजीपुर नगर के महुआबाग स्थित गजल होटल की भूमि के खरीद-फरो’ख्त के मा’मले में की गई हे’राफेरी को संज्ञान में लेते हुए मुख्तार अंसारी के पुत्र अब्बास अंसारी एवं उमर अंसारी व अन्य के खि’लाफ कोतवाली में मु’कदमा दर्ज है। मुख्तार के दोनों बेटों के अधिवक्ता ने न्यायालय में अग्रिम जमानत अर्जी प्रस्तुत की।

जिस पर अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर तीन की अदालत में सुनवाई हुई। सहायक शासकीय अधिवक्ता जय प्रकाश सिंह एवं आरोपी पक्ष के अधिवक्ता के तर्कों को सुनने के बाद अग्रिम जमानत अर्जी को आधारहीन मानते हुए कोर्ट ने खारिज कर दिया।

इसी प्रकरण में खुदाईपुरा निवासी सादिक हुसैन भी आ’रोपी है। इनके द्वारा कागजात में नाम न होने के बावजूद गाटा संख्या 99 से छह धूर एवं गाटा संख्या 98/2 से एक विस्वा जमीन विक्रय की गई थी। मु’कदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने इसे गि’रफ्तार कर जेल भेज दिया था। सादिक की जमानत अर्जी न्यायालय में पेश की गई थी। इस पर सुनवाई हुई। न्यायालय ने जमानत का पर्याप्त आधार न पाते हुए सादिक हुसैन की ज’मानत अर्जी खारिज कर दी।