मोदी की सरकार राजीव गांधी की सरकार की तरह घुटने नहीं टेकती : मुख्तार अब्बास नकवी

अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी (Mukhtar Abbas Naqvi) का कहना है कि तुरंत तीन तलाक (Triple Talaq) को ख’त्म करने के लिए बनाया गया का’नून न तो बदला जाएगा और न ही वापस होगा. उन्होंने कहा है कि ये नरेंद्र मोदी की सरकार है राजीव गांधी की नहीं और ये सरकार घुटने नहीं टेकती है. इस का’नून के बनने का एक साल कल पूरा हो रहा है.

नकवी का दा’वा है कि इसके बाद पिछले एक साल में तुरंत तीन तलाक या तलाक ए बिद्दत के मा’मलों में पूरे देश में 80 प्रतिशत की कमी आई है.  नकवी ने कहा कि इस कानून के बनने से मुस्लिम महिलाओं (Muslim Women) को ताकत मिली है. इससे तीन तलाक के अप’राध कम हुए हैं. इसमें सामाजिक संस्थाओं का भी योगदान रहा है. नकवी के मुताबिक ये काम पहले होना चाहिए था. लेकिन देर आए दुरुस्त आए.

नकवी के मुताबिक तीन तलाक इंसानियत के खिला’फ है. ये कु’रीति है जो भारत में जारी रही. यह पूछने पर कि जब सुप्रीम कोर्ट इसे अं’सवैधानिक बता चुका था तो का’नून बनाने की क्या जरूरत थी, नकवी ने त’ल्ख अंदाज में पूछा कि क्या क़’त्ल संवैधानिक है? बला’त्कार संवैधानिक है क्या? चोरी करना संवैधानिक है क्या? ये सब असं’वैधानिक हैं, तभी इनकी स’जा देने के लिए क़ा’नून बनाया गया.

उन्होंने कहा कि लम्हों ने ख़’ता की थी, दशकों ने पाई. नकवी के मुताबिक इसे मज़हब की नज़र से न देखा जाए. ये लैंगिक समानता से जुड़ा हुआ फैसला है. नकवी ने कहा कि कांग्रेस भी ये काम कर सकती थी. सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इसे प्रभावी बनाया.

नकवी के मुताबिक पिछले एक साल के आंकड़ों से पता चलता है कि जमीन पर इस का’नून का असर हुआ है. हमने अल्पसंख्यक कमीशन से रिपोर्ट मांगी.

पूरे देश में केवल तीन आ’परा’धिक केस आए. हमने अलग-अलग राज्यों से रिपोर्ट ली. 80% से ज़्यादा के’स कम हुए हैं. दु’रु’पयोग का कोई मा’मला सामने नहीं आया है. लोगों को एहसास है कि ये कु’रीति है और ये काम पहले होना चाहिए था.

यह पूछने पर कि कुछ मुस्लिम संगठनों ने तीन तलाक का’नून के खिला’फ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है और उनकी दलील है कि शौ’हर को जेल भेजकर इंसाफ नहीं मिल सकता, नकवी ने कहा कि ये देश संविधान से चलता है. कुछ लोगों ने मू’र्खता का ठे’का लिया और उनका इलाज नहीं किया जा सकता. नकवी ने कहा कि ये कु’तर्क हैं. बेहतर तो यही है कि ऐसे काम मत करो कि जेल जाना पड़े. उन्होंने दो टू’क कहा कि न तो ये का’नून वापस होगा और न ही इसमें बदलाव किया जाएगा.

ये संसद में चर्चा के साथ क़ा’नून आया है. नकवी ने कहा कि ये मोदी जी की सरकार है, राजीव गांधी की सरकार नहीं है. हम घुटने नहीं टेकते. पूरे देश में इस क़ा’नून का स्वागत किया गया है. सिर्फ़ मुट्ठी भर लोग इसके ख़िला’फ़ हैं. ये मोदी जी का विकास का मसौदा है और ये वोट का सौदा नहीं है. हम समाज के सुधार के लिए काम करते हैं. वोटों के उधार के लिए काम नहीं करते.

जब नकवी से इस आ’रोप पर पूछा गया कि क्या यह का’नून एक विशेष समुदाय को निशा’ना बनाने के लिए लाया गया, तो नकवी ने कहा कि कई इस्लामी देशों में तीन तलाक पर पा’बंदी है. मिस्र ने किसे निशा’ना बनाया? पा’किस्तान ने किसे निशा’ना बनाया?  ये तो सब इस्लामिक देश हैं. इस्लामिक देश किसे निशा’ना बना रहे?

कल ईद के मौके पर उन्होंने कहा कि कोरोना सं’कटकाल में कई त्योहार आए हैं. महामा’री में सबने संयम रखा है. कोरो’ना का क़’हर कम नहीं हुआ है. दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा. हमें एहतियात बरतनी होगी. हिफ़ाज़त के साथ इबादत करें. उन्होंने बताया कि वे भी कल घर पर ही नमाज़ पढ़ेंगे. हज सीमित संख्या में हो रहा है. इस बार अमरनाथ यात्रा भी नहीं हो रही है. कांवड़ भी नहीं हुआ.

जब नकवी से पूछा गया कि पांच अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर के लिए भूमिपूजन हो रहा है जबकि अभी वहां एक पुजारी और कई लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं तो इस पर नकवी ने कहा कि अयोध्या में समझदार लोग हैं. अयोध्या पर विवा’द की ज़रूरत नहीं.

ओवैसी ने कहा है कि पीएम मोदी ने संविधान की शपथ ली है और उन्हें वहां नहीं जाना चाहिए. इस पर नकवी ने कहा कि विवा’द की जरूरत नहीं है. अल्लामा इक़बाल ने कहा था भगवान राम इमाम-ए-हिंद हैं. राम जन्मभूमि पर फ़ैसला आना था उससे पहले मेरे घर पर सभी समुदाय के वरिष्ठ लोगों को बुलाया गया था. सबने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के सम्मान की बात कही थी. हमने फ़ैसले को स्वीकार किया और उसी फ़ैसले के हिसाब से राम मंदिर का निर्माण होने जा रहा है.