सीएम योगी का सवाल : मुगल कैसे हो सकते हैं हमारे हीरो? बदला ‘मुगल म्यूजियम’ का नाम

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आगरा में मुगलों की विशेष उपलब्धियों को प्रदर्शित करने वाले ‘मुगल म्यूजियम’ (मुगल संग्रहालय) का नाम बदल कर छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर रखने का आदेश दिया है। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि योगी ने सोमवार को यहां अपने सरकारी आवास पर वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से आगरा मंडल के विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान यह आदेश दिए।

योगी ने दा’वा किया कि उनकी सरकार हमेशा रा’ष्ट्रवा’दी विचा’रधा’रा को पोषित करती है और और ऐसी किसी भी चीज से पर’हेज किया जाएगा जिससे गुला’मी की बू आती हो। उन्होंने जोर देते हुए कहा ‘मुगल हमारे नायक कैसे हो सकते हैं।’ छत्रपति शिवाजी का नाम राष्ट्र’वा’द और आ’त्मसम्मा’न की भावना का संचार करेगा।

ताजमहल के पूर्वी गेट के नजदीक बन रहे मुगल संग्रहालय में मुगलों के दौर में हासिल की गई राजनीतिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों को कलाकृतियों के माध्यम से प्रर्दिशत किया जाएगा। लगभग 52 वर्ग मीटर क्षेत्र में बन रहे इस संग्रहालय के निर्माण पर करीब 20 करोड़ रुपए खर्च होंगे। वर्ष 2017 में बनना शुरू हुए इस संग्रहालय का निर्माण 2019 तक पूरा हो जाना था।

योगी ने समीक्षा बैठक में आगरा मंडल में खारे पानी की सम’स्या का जिक्र करते हुए कहा कि पेयजल की योजनाओं पर खास ध्यान दिया जाए। लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए अट’ल भूजल योजना के तहत कार्य कराया जाए। जल-जीवन मिशन की योजनाएं आगे बढ़ाई जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगरा स्मार्ट सिटी और अमृत योजना के कार्यों को शीघ्रता से पूर्ण किया जाए।

ताजमहल के पूर्वी गेट के नजदीक बन रहे मुगल संग्रहालय का काम 2016 में शुरू किया गया था। इस म्यूजियम की नींव पूर्व मुख्य मंत्री अखिलेश यादव ने राखी थी। उस दौरान इस परियोजना का हिस्सा रहे पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन ने कहा “पर्यटकों को शहर के भव्य मुगल युग से परिचित करने के लिए इसे बनाया गया था।

इसमें रचनात्मक रूप से तैयार की गई जगह में मुगल इतिहास और वास्तुकला को प्रदर्शित किया जाना था। सटीकता सुनिश्चित करने के लिए इतिहासकारों और विद्वानों को समिति में लाया जाना था।”

रंजन ने कहा “संग्रहालय क्या प्रदर्शित करेगा यह बदलने के निर्णय ने इतिहासकारों को आश्चर्यचकित कर दिया है।” इतिहासकार और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में प्रोफेसर इरफान हबीब ने कहा “ताज महल के निर्माण से 150 साल पहले मुगल हिंदुस्तान में थे। आगरा में सभी स्मारक उनके द्वारा बनाए गए। शहर का इतिहास मुगलों का इतिहास है।”