महंगी होगी मॉडर्ना की कोरोनावायरस वैक्सीन, हर एक खुराक के लिए कंपनी वसूलेगी………….

दुनियाभर में कोरोनावायरस की तीसरी लहर ने आम जनजीवन को एक बार फिर अस्त-व्यस्त कर दिया है। ऐसे में ज्यादातर देशों की निगाहें अब कोरोनावायरस की वैक्सीन पर टिकी हैं। इस मामले में रूस की स्पूतनिक और अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना और फाइजर की वैक्सीन सबसे पहले आने की संभावना है। वहीं, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्रा जेनेका की कोरोना वैक्सीन के भी फरवरी के बाद लॉन्च होने की संभावनाएं हैं।

बता दें कि जहां स्पूतनिक 92 फीसदी असरदार है, वहीं मॉडर्ना 94.5 फीसदी और फाइजर-बायोएनटेक की वैक्सीन 95 फीसदी प्रभावी पाई गई हैं। कंपनियों ने अब आम जनता के लिए अपनी कीमतों का खुलासा करना भी शुरू कर दिया है। जहां ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन तैयार कर रही सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला ने कीमतों को बेहद किफायती रखे जाने की बात कही थी, उन्होंने बताया था कि भारत में कोविशील्ड वैक्सीन की कीमत 500-600 रुपए प्रति डोज तक हो सकती है।

अब मॉडर्ना के सीईओ स्टेफान बांसेल ने एक जर्मन अखबार को बताया है कि उनकी वैक्सीन फ्लू में लगने वाली वैक्सीन के समान कीमत की होगी। इसकी एक डोज की कीमत 25 डॉलर से 37 डॉलर (यानी 1800 से 2700 रुपए) तक हो सकती है। वहीं, फाइजर की वैक्सीन को किसी भी तरह की फंडिंग न मिलने की वजह से इसकी एक डोज की कीमत तीन हजार रुपए से ऊपर रहने की संभावना है।

Sputnik-V और NOVOVAX की वैक्सीन की कीमतें अभी तय नहीं: गौरतलब है कि रूस की स्पूतनिक-वी वैक्सीन की कीमतें अभी तय नहीं हैं। भारत में इसके उत्पादन का काम डॉक्टर रेड्डीज लैब को करना है। दूसरी तरफ अमेरिकी कंपनी नोवोवैक्स की कोरोना वैक्सीन की कीमत का खुलासा अभी कंपनी की ओर से नहीं किया गया है, पर अदार पूनावाला का सीरम इंस्टीट्यूट ही इसका निर्माण करेगा और माना जा रहा है कि इसकी कीमत भी काफी कम ही रखी जाएगी।

मॉडर्ना और फाइजर की वैक्सीन को अमेरिकी फूड एंड ड्रग्स एडिमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) की तरफ से अब आपात मंजूरी मिलने का ही इंतजार है। फाइजर ने इस साल के अंत तक 2-4 करोड़ डोज उतारने की बात कही है। अगले साल दोनों कंपनियां 100-100 करोड़ वैक्सीन डोज का उत्पादन करेंगी।

Pfizer या मॉडर्ना भारत के लिए कौन सी वैक्सीन बेहतर?:

जानकारों की मानें तो फाइजर की वैक्सीन सामान्य फ्रीजर में सिर्फ पांच दिन ही ठीक रह सकती है, जबकि इसे लंबे समय तक स्टोर करने के लिए माइनस 70 डिग्री तापमान की जरूरत होगी। दूसरी तरफ मॉडर्ना की वैक्सीन को बहुत ठंडे तापमान में रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसे 2 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान में 30 दिन के लिए रेफ्रीजरेट किया जाता है।

यह समय बायोएनटेक और फाइजर की वैक्सीन की तुलना में काफी ज्यादा है। यह -20 डिग्री सेल्सियस (-4 फारेनहाइट) तापमान में छह महीने तक और कमरे के सामान्य तापमान में 24 घंटे तक सुरक्षित रह सकती है। यानी मॉडर्ना की वैक्सीन भारत के दूर-दराज के इलाकों में कोल्ड स्टोरेज की समस्या की वजह से प्रभावित नहीं होगी।