गेस्ट हाउस कांड को लेकर आ रही बॉलीवुड की फिल्म ‘मैडम चीफ मिनिस्टर’, सपा-बसपा का आया ये रिएक्शन

मायावती के जीवन का सबसे काला दिन साल 1995 में तब आया था जब गेस्ट हाउस कांड हुआ था। इसके बाद से बसपा और सपा के राजनैतिक मतभेद, मनभेद में बदल गए थे।तभी से सपा के मुखिया रहे मुलायस सिंह यादव की धुर विरोधी मायावती बन गई थीं। सालों पुराना गेस्ट हाउस कांड एक बार फिर चर्चा में आ गया है, क्योंकि फिल्म मैडम चीफ मिनिस्टर में नाम से लेकर विवाद तक को हूबहू फिल्माने का प्रयास किया गया है।

बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश यादव के बीच भले ही बुआ-भतीजे का राजनैतिक समीकरण 2017 विधानसभ चुनाव में देखने को मिला था, लेकिन ये संबंध चुनाव तक ही नजर आया था। बसपा और सपा का गठबंधन कभी लंबा नहीं रहा और साल 1995 में जब ये टूटा तो इसका खामियाजा मायावती को गेस्ट हाउस कांड के रूप में भुगतना पड़ा था। अब फिल्म मैडम चीफ मिनिस्टर इस कांड को फिर से हरा-भरा करने पर उतारू है।

दलित समाज के उत्थान पर आधारित ये फिल्म मायावती की फिल्म बताई जा रही है। नाम और कहानी में मामुली बदलाव कर इसे बसपा और सपा के राजनैतिक विवाद का काल्पनिक रुपांतरण कहा जा सकता है।

इस फिल्म में मायावती के राजनीति में आने के सफर को छोड़ दिया जाए तो बहुत कुछ अंश मायावती के जीवन से उठाया गया है।

 

फिल्म में मायावती के राजनैतिक गुरु कांशीराम का भी काल्पनिक चित्रण किया गया है।

मायावती के रुतबे, स्टाइल और बोलने के तरीके को भी कुछ हद तक इस्तेमला किया गया है, लेकिन इस फिल्म का बड़ा हिस्सा गेस्ट हाउस कांड है।

मायावती के गेस्ट हाउस कांड को मिर्च-मसाले के साथ हूबहू यहां उठाने की कोशिश हुई है।

फिल्म में गेस्ट हाउस कांड के मुख्य आरोपी का नाम आलोक यादव है। इससे सपा नाराज है। सपा का आरोप है कि इससे यादवों की छवि खराब कर सत्ता पक्ष को फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

 

बसपा भी इस फिल्म का विरोध कर रही है, क्योंकि ऋचा चड्ढा का किरदार उनकी नेता मायावती को ध्‍यान में रखकर बनाया गया है और कई तथ्‍यों को तोड़ा मरोड़ा गया है।