कृषि कानू’नों के खि’लाफ केरल सरकार उठाएगी ये बड़ा कदम

केरल सरकार ने तीन नए Farm Laws के खि’लाफ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा ख’टखटाने का फैसला लिया है। सूबे के कृषि मंत्री वीएस सुनील कुमार ने समाचार एजेंसी ANI को सोमवार को बताया, “हम इस हफ्ते खुद टॉप कोर्ट जाएंगे। किसान-विरो’धी कानू’न हम अपने यहां लागू नहीं होने देंगे। हम इसके विकल्प पर विचार करेंगे।”

हालांकि, किसानों के प्रदर्श’न पर विपक्षी द’लों की लामबं’दी को BJP ने विरो’धियों का “श’र्मनाक दोहरा मापदं’ड” बताते हुए उसकी आलोचना की और दा’वा किया कि नए कानू’न के कई प्रा’वधानों का कभी कांग्रेस और राकांपा जैसे दलों ने समर्थन किया था। प्रदर्श’नकारी किसान सं’गठनों द्वारा मंगलवार को बुलाए गए ‘भारत बं’द’ का विपक्षी दलों द्वारा समर्थन किया जा रहा है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि अपना अस्तित्व बचाने के लिये भाजपा के विरो’धी दल किसानों के प्रदर्श’न में कू’द प’ड़े हैं जबकि विभिन्न चु’नावों में देश की जनता उन्हें बार-बार खारिज कर चुकी है।

प्रसाद ने आ’रोप लगाया कि किसानों का एक वर्ग “निहित स्वार्थ” वाले कुछ लोगों के चंगुल में है और सरकार सुधारों को लेकर उनके बीच फैलाये गए भ्र’म को दूर करने पर काम कर रही है। किसानों का एक वर्ग, विशेष रूप से पंजाब के किसान इन नए कृषि कानू’नों को लेकर स’ख्त विरो’ध में है। भाजपा नेता ने राजनीतिक दलों को अपने प्रदर्श’न से नहीं जुड़ने देने के लिये कृषक सं’घों की सराहना भी की।

पत्रकारों को संबोधित करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि 2019 के लोकसभा चुनावों के लिये कांग्रेस के घोषणा-पत्र में कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) अधिनियम को र’द्द करने और कृ’षि-व्यापार को सभी पाबं’दियों से मु’क्त करने का वादा था। प्रसाद ने कहा, “राहुल गांधी ने 2013 में सभी कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को निर्देश दिया था कि वे फलों व सब्जियों को एपीएमसी की सूची से हटा’एं और उन्हें सीधे खुले बा’जार में बेचने की इजाजत दें।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संप्रग सरकार में कृषि मंत्री रहते हुए रा’ष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर कृषि क्षेत्र में निजी सेक्टर की ज्यादा भा’गीदारी की वकालत की थी और ऐसा करने के लिये उपयुक्त नियामक व नीतिगत ब’दलाव की जरूरत को उजागर किया था। प्रसाद ने कहा, “शरद पवार ने 2005 के एक साक्षात्कार में कहा था कि एपीएमसी अधिनियम छह महीनों में र’द्द कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब तक राज्य अधिनियम में संशोधन और खेतों में निजी क्षेत्र को प्रवेश की इजाजत नहीं देंगे तब तक राज्यों को केंद्र से वित्तीय सहायता नहीं मिलेगी।”

उन्होंने कहा कि कांग्रेस और राकांपा ने कभी जिस बात का आह्वाहन किया था मोदी सरकार द्वारा बनाए गए कानू’न से उसका मार्ग प्रशस्त हुआ है। भाजपा के प्रतिद्वंद्वियों को आ’ड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा, “वे सत्ता में रहने के दौरान जो करने के लिये काम कर रहे थे अब उसका विरो’ध कर रहे हैं।

यह उनके श’र्मनाक दोहरे मापदं’ड को उजागर करता है। यह सिर्फ विरो’ध जताने के लिये विरो’ध है।” भाजपा नेता ने कहा कि संप्रग के सत्ता में रहने के दौरान त’त्कालीन योजना आयोग (अब नीति आयोग) ने अंतरराज्यीय कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य नियमन अधिनियम की सिफारिश की थी।

प्रसाद ने कहा कि संप्रग सरकार के दौरान ठेका खेती की भी सिफारिश की गई थी और कई राज्य सरकारों ने अपने यहां ठे’का खेती को लागू भी किया था। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर नि’शाना सा’धते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आप सरकार ने नवंबर में नए कृषि कानू’न को अधिसूचित किया था लेकिन अब उसका विरो’ध कर रही है।

केंद्रीय मंत्री ने इस दौरान न्यूनतम समर्थन मूल्य और कृषि मंडियों की व्यवस्था को जारी रखने की सरकार की प्रति’बद्धता एक बार फिर दोहराई। केंद्र के नए कृषि कानू’नों को र’द्द किये जाने की मांग को लेकर बीते 11 दिनों से दिल्ली की सीमा पर प्रदर्श’न कर रहे कृषक सं’घों द्वारा आठ दिसंबर को बुलाए गए ‘भारत बं’द’ का रविवार को कई क्षेत्रीय द’लों समेत विपक्षी दलों ने समर्थन करने का ऐलान किया है।