किसान आंदोलन को लेकर अब आरएसएस का आया ये बड़ा बयान, कहा- “राष्ट्र वि’रोधी’’ और ‘‘असा’माजिक’’ ताकतें केंद्र…

राष्ट्रीय स्वयं सेवक सं’घ (आरएसएस) ने शुक्रवार को दा’वा किया कि ‘‘रा’ष्ट्र विरो’धी’’ और ‘‘असा’माजिक’’ ताकतें केंद्र के तीन नए कृषि का’नूनों के खि’लाफ जारी किसानों के आं’दोलन का समाधान निकालने के प्रयासों को विफल करने का प्रयास कर रही हैं. उसने कहा कि किसी भी प्रदर्श’न का बहुत लंबे समय तक जारी रहना किसी के भी हित में नहीं है.

संघ ने कहा कि चर्चा आवश्यक है और कुछ सहमतियों पर पहुंचना भी जरूरी है, भले ही सारे मु’द्दों का समाधान न निकले. गौरतलब है कि संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (एबीपीएस) की दो दिवसीय बैठक शुक्रवार से आरंभ हुई.उल्लेखनीय है कि सौ से भी अधिक दिनों से किसान केंद्र के तीन नए कृषि कानू’नों के विरो’ध में दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्श’न’ कर रहे हैं और इन कानू’नों को र’द्द करने की मांग कर रहे हैं.

आरएसएस ने रिपोर्ट-2021 में कहा, ‘‘किसी भी तरह का आंदोलन लंबे समय तक चले यह किसी के हित में नहीं है. चर्चा आवश्यक है लेकिन यह समाधान निकालने के विचार के साथ होनी चाहिए. संभव है कि सभी मुद्दों पर सहमति न बन पाए लेकिन किसी न किसी सहमति पर पहुंचना भी आवश्यक है.’’उसने कहा कि यह भी चिंता का विषय है कि आंदोलनों के कारण दैनिक जीवन अब भी प्रभावित हो रहा है और ‘‘समस्या और गं’भीर हो जाती है जब राष्ट्र वि’रोधी और असा’माजिक ता’कतें समाधान निकालने के प्रयासों को विफल करने के प्रयास करती हैं.’’ उसने आगाह किया कि वर्तमान आं’दोलन के नेतृत्व को ऐसे हा’लत नहीं बनने देना चाहिए.

संघ ने कहा, ‘‘हमें ऐसा महसूस हो रहा है कि कुछ समय से ऐसी राष्ट्र वि’रोधी ता’कतें देश में ग’ड़बड़ी और अस्थिरता का माहौ’ल बनाने की को’शिश कर रही है ताकि वे अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षाओं को पा सकें.’’ उसने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि ऐसी कोई समस्या नहीं होती जिसका समाधान न हो, जरूरत है तो बस गं’भीर प्रयासों की.’’

उसने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपने विचारों को अभिव्यक्त करने की आजादी है लकिन किसी को भी देश में ग’ड़बड़ी फै’लाने और अस्थिरता पै’दा करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता है. संघ ने कहा कि यह आं’दोलन समय के साथ तेज हुआ है.