‘केंद्र के पास ये अंतिम मौका’, सरकार से वार्त्ता शुरू होने से पहले किसानों ने कह दी ये बड़ी बात

तीन नए किसान कानू’नों के खि’लाफ आं’दोलन कर रहे किसानों से केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों की आज चौथी बार बातचीत होनी है लेकिन उससे पहले किसानों ने सरकार से साफ तौर पर कहा है कि सरकार के पास बातचीत का यह अं’तिम मौका है. किसानों का कहना है कि केंद्र सरकार जल्द से जल्द संसद का आपातकालीन सत्र बुलाए और उसमें तीनों नए कृषि कानू’नों की जगह नया बिल लाए. तीनों नए कानू’नों को विवा’दित कानू’न बताकर किसान सितंबर से ही आं’दोलनरत हैं.  इधर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह की आज किसान आंदोलन पर बातचीत होनी है.

 

अपनी रणनीति को चाक-चौबंद करने के लिए दो आंतरिक बैठकों के बाद किसानों ने सरकार को चे’तावनी दी है कि उनके आं’दोलन को केवल पंजाब के किसानों द्वारा चलाए जा रहे विरो’ध प्रदर्श’न न कहे. किसानों ने कहा कि देश भर के किसान “अपनी मांगों के लिए एकजुट” हैं और जब तक “का’ले” कानू’नों को वापस नहीं लिया जाता है, तब तक उनका विरो’ध जारी रहेगा.

किसानों ने चे’तावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि तीनों किसान कानू’नों को र’द्द नहीं किया गया तो वे दिल्‍ली के रास्‍ते ब्‍लॉक कर देंगे. किसानों ने ये भी कहा है कि सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाकर इन कानू’नों को र’द्द करे अन्यथा किसान दिल्ली ब्लॉक कर देंगे. उन्होंने यह भी कहा है कि सरकार पंजाब के किसानों के अलावा पूरे देश के किसान नेताओं को बातचीत के लिए बुलाए.

किसानों ने कहा कि केंद्र बातचीत के बहाने मा’मले को ठं’ड के मौसम में आगे बढ़ाकर ल’टकाना चाहता है. किसानों का आरो’प है कि यह केंद्र सरकार का “अमानवीय” रुख है. किसानों ने कहा कि ठं’ड के बावजूद उनका आं’दोलन चलता रहेगा. इन विरो’ध प्रदर्श’नों के दौरान कम से कम तीन किसानों की मौ’तों द’र्ज हुई है.

प्रदर्श’न कर रहे किसानों के नेताओं ने बुधवार को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को पत्र लिखकर सरकार से नये कृषि कानू’नों को निरस्त करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने और किसानों की एकता को भं’ग करने के लिए “विभा’जनकारी एजें’डे में नहीं शामिल होने” की मांग की. आंदोलन की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चो को-ऑर्डिनेशन कमिटी ने पत्र में कहा है, “हम सरकार से किसान आंदोलन के संबंध में किसी भी वि’भाजन’कारी एजें’डे में शामिल नहीं होने की मांग करते हैं क्योंकि यह आंदोलन इस वक्त अपनी मांगों पर एकजुट है.”

पत्र के अनुसार नेताओं ने केंद्र से यह सुनिश्चित करने की मांग की कि विभिन्न किसान सं’गठनों एवं उनके गठबंधनों के प्रतिनिधि किसान तय करें न कि सरकार तय करे तथा इस आंदोलन के अगुवा ऑल इंडिया गठबंधन को चर्चा में प्रतिनिधित्व मिले.

पंजाब के मुख्यमंत्री और उनकी कांग्रेस पार्टी किसान आंदोलन का समर्थन कर रही है और पंजाब विधानसभा ने केंद्र के नये कृषि कानू’नों को निष्प्रभावी बनाने के लिए विधेयक भी पारित किये हैं. अमरिंदर सिंह ने कहा था कि वह और उनकी सरकार सभी के सामूहिक हित में केंद्र और किसानों के बीच मध्यस्थता के लिए तैयार है.

उधर, दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्श’नकारियों की बढ़ती ता’दाद के बीच ट्रांसपोर्टरों के शीर्ष संगठन ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने आंदो’लनकारी किसानों का समर्थन करते हुए उत्तर भारत में आठ दिसंबर से परिचालन बं’द करने की बुधवार को ध’मकी दी है. एआईएमटीसी लगभग 95 लाख ट्रक ड्राइवरों और अन्य संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करने का दावा करती है.

केंद्र और प्रदर्श’नकारी किसानों के प्रतिनिधियों के बीच बृहस्पतिवार को दूसरे चरण की बातचीत होने से पहले बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और रेल मंत्री पीयूष गोयल के साथ बैठक कर नए कृषि कानू’नों से जुड़ी चिं’ताओं को दूर करने के उपायों पर चर्चा की. तोमर, गोयल और वाणिज्य राज्य मंत्री सोम प्रकाश ने मंगलवार को किसान नेताओं के साथ बातचीत के दौरान केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व किया था लेकिन उनकी बातचीत विफल रही थी.

‘दिल्ली चलो’ मार्च के तहत किसान अपनी मांगों पर द’बा’व बनाने के लिए राष्ट्रीय राजधानी के चार व्यस्त सीमा मार्गों पर प्रदर्श’न कर रहे हैं. इन स्थानों पर पुलिस का भारी बंदोबस्त किया गया है. नए कृषि कानू’नों के खि’लाफ विरो’ध प्रदर्श’न कर रहे 35 किसान संगठनों के नेताओं ने सिंघू बोर्डर पर बैठक की जिसमें भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने भा’ग लिया.

क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘तीनों कृषि कानू’नों को निरस्त करने के लिए केंद्र को संसद का विशेष सत्र आहूत करना चाहिए. हम तीनों कृषि कानू’नों को वापस लिए जाने तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे.”