जाने क्यों भारतीय अमरीकी राष्ट्रपति उम्मीदवार कमला हैरिस के कश्मीर पर बयानों की हो रही है चर्चा

कमला हैरिस के भारत से नाते के साथ-साथ कश्मीर, नागरिकता संशोधन क़ा’नून (सी’एए) और भारत से जुड़े अन्य मसलों पर उनके विचारों को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है.

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने और उसके बाद लगे प्रतिबं’धों को लेकर कमला हैरिस का रुख भारत सरकार के विपरीत रहा है.सितंबर 2019 को टेक्सास के ह्यूस्टन में आयोजित एक इवेंट में उनसे कश्मीर में फोन व इंटरनेट पर लगे प्रति’बंध और लोगों को हिरासत में लेने के बारे में पूछा गया था.इस पर कमला हैरिस ने कहा था, “हम लोगों को ये बताना चाहते हैं कि वो अकेले नहीं हैं, हम नज़र बनाए हुए हैं. एक राष्ट्र के तौर पर हमारे मूल्य हैं कि हम मानवाधिकार हनन के बारे में बोलते हैं.”

किसी ने इसे कश्मीर पर एक क’ड़ा बयान बताया तो किसी ने कहा कि कमला हैरिस ने जो कहा, राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल कोई भी अमरीकी नेता अपने कैंपेन के दौरान ऐसा ही कहता.

दिसंबर 2019 में कमला हैरिस ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की भारतीय मूल की अमरीकी सांसद प्रमिला जयपाल से मुलाकात ना करने को लेकर निं’दा की थी. प्रमिला जयपाल मोदी सरकार की आलो’चक रही हैं.

उन्होंने ट्वीट किया था, “किसी भी विदेशी सरकार के लिए कांग्रेस से ये कहना गलत है कि बैठक में कौन से सदस्य होंगे. मैं प्रमिला जयपाल के साथ खड़ी हूं और मुझे खुशी है कि सदन में उनके सहकर्मियों ने भी ऐसा ही किया.”कमला हैरिस आव्रजन, शरणार्थि’यों और मुस्लि’मों पर प्रतिबं’ध पर ट्रंप प्रशासन की नीतियों की आलो’चक भी रही हैं.

मोदी का किया था स्वागत

लेकिन, इन सभी बातों को कमला हैरिस के एक पक्ष के रूप में देखा जाता है.साल 2017 में उन्होंने एक ट्वीट करके भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अमरीका में स्वागत किया था.हडसन इंस्टीट्यूट इंडिया इनिशिएटिव की डायरेक्टर अपर्णा पांडे कमला हैरिस को लेकर मानती हैं कि दोनों पक्षों के लिए उनके विचार अत्यधिक कड़े नहीं हैं.

अपर्णा कहती हैं, “क’श्मीर में क्या हो रहा है क्या उन्होंने इस बारे में पूछा. यहां तक कि विदेश मंत्रालय भी कश्मीर का ज़िक्र करता है.”हालांकि, पाकिस्तान अमरीकन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी के डॉक्टर राव कामरान अली कहते हैं, “पाकिस्तानी अमरीकी होने के नाते हम बहुत खुश हैं. कश्मीर पर उनका बयान स्पष्ट है. उन्होंने कश्मीरियों के अधिकारों को खारिज नहीं किया. वो हाउडी मोदी कार्यक्रम में भी नहीं गईं.”

भारतीय मूल की कमला पर बाइडन का दांव

कुछ महीनों पहले राष्ट्रपित ट्रंप का भारत में बहुत गर्मजोशी से स्वागत किया गया था वहीं, ट्रंप ने ह्यूस्टन में शानदार हाउडी मोदी कार्यक्रम में मोदी के साथ मिलकर लोगों के बीच घूमते हुए हाथ लहराया था.एक दूसरा नज़रिया ये कहता है कि कमला हैरिस बहुत समझदार हैं वो खुद को आलोचक या समर्थक की किसी एक श्रेणी में बांधना नहीं चाहतीं.

इस समय विश्लेषक विभिन्न मुद्दों और विषयों पर कमला हैरिस के पुराने रुख और बयानों को खंगाल रहे हैं.पिछले कुछ महीनों में भारत की मोदी सरकार को क’श्मीर से धा’रा 370 हटाने, उसके बाद प्रतिबंध लगाने, सीएए, दि’ल्ली दं’गे और लिं’चिंग और मुस्लिमों के ख़िला’फ़ हिं’सा को लेकर अमरीका में आ’लोचना का सामना करना पड़ा है.

हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप इस पर ज़्यादा कुछ कहने से बचते हैं लेकिन शीर्ष डेमोक्रेट्स जैसे बर्नी सैंडर्स और एलिजाबेथ वॉरेन ने कश्मीर पर भारत की नीतियों को लेकर असहजता प्रकट की है.

क्योंकि कमला हैरिस को जो बाइडेन ने उम्मीदवार बनाया है तो नवंबर में राष्ट्रपति चुनाव जीतने की स्थिति में दक्षिण एशिया के विवा’दित मुद्दों को लेकर उनके विचार पूछे जा रहे हैं.अपर्णा पांडे कहती हैं, “हमारा संविधान कहता है कि हम धर्मनिरपेक्ष हैं, हम अल्पसं’ख्यकों की रक्षा करेंगे. अमरीक का संवि’धान भी यही कहता है. अगर कोई उम्मीदवार सीरि’या, लेबनान, वीगर की बात करता है तो उसे मानवाधिकार की स्थिति (भारत में) पर भी बोलना होगा.”

लेकिन क्या उन्हें मोदी की आ’लोचक और भारत की कश्मीर नीति पर मुखर नेता के तौर पर देखना चाहिए?एक नज़रिया ये कहता है कि उनके बयानों से अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिलता.दूसरा नज़रिया कहता है कि भारत किसी भी आलो’चना को लेकर संवेदनशील रहता है.

एक विश्लेषक का कहना है, “अगर मैं आपका दोस्त हूं तो मुझे आपकी हर चीज़ को पसंद करना होगा. कश्मीर का ज़िक्र भी आपको दु’श्मन बना देता है. पूरा अमरीका कह रहा है कि अपने संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखो.”

जो बाइडन का विज़न डॉक्यूमेंट

जो बाइडन के विज़न डॉक्यूमेंट में कश्मीर और एनआरसी का ज़िक्र होना उस कैंप में कई लोगों को पसंद नहीं आ रहा है. कुछ इसे कमला हैरिस के नज़रिए से भी जोड़कर देख रहे हैं.

‘हिंदू-मुस्लि’म के लिए जो बाइडन का एजेंडा’ शीर्षक के तहत उनका विज़न डॉक्यूमेंट कहता है, “कश्मीर में भारत सरकार को कश्मीर के लोगों के अधिकारों को बहाल करने के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाने चाहिए.”डॉक्यूमेंट कहता है, “असह’मति पर प्रति’बंध, जैसे शांतिपूर्ण वि’रोध प्रद’र्शनों को रोकना या इंटरनेट को बंद या धीमा कर देना लोकतंत्र को कमज़ोर करता है.”

विवा’दित एनआ’रसी पर डॉक्यूमेंट कहता है, “जो बाइडन भारत सरकार के उन तरीक़ों से निराश हैं जो असम में राष्ट्रीय नागरिकता रजि’स्टर (एन’आर’सी) को लागू करने के लिए और उसके बाद अपनाए गए और नागरिकता संशोधन अधिनियम पारित किया गया.”

अब इसकी वजह से अब हिंदू अमरीकियों पर भी इसी तरह के पॉलिसी पेपर की मांग होने लगी है.डेमोक्रेटिक पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जो बाइडन और उप राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार कमला हैरिस जो बाइडन के कैंपेन के अनुसार चुनावी टक्कर वाले आठ राज्यों में 1.31 मिलियन महत्वपूर्ण भारतीय अमरीकी वोट हैं.जो बाइडन के कश्मीर और एनआरसी का उल्लेख करने के बावजूद भारतीय अमरीकी वोटों के लिए आ’क्रामक रूप से अभियान चल रहा है.बाइडन कैंप भारतीय और पाकिस्तानी अमरीकियों को लुभाने के लिए 14 और 15 अगस्त को वर्चुअल इवेंट्स रख रहा है.

ट्रंप के अभियान को भी बड़ी संख्या में भारतीय अमरीकी वोट मिलने की उम्मीद है.

ट्रंप विक्टरी इंडियन अमरीकन फाइनेंस कमिटी के एक अनुमान के मुताबिक 50 प्रतिशत संभावित भारतीय अमरीकी मतदाता “डेमोक्रेट्स को छोड़ देंगे” और “राष्ट्रपति ट्रंप के लिए वोट करेंगे.

एक विश्लेषक कहते हैं, “भारत में मुसल’मानों के साथ जो हो रहा है वो पूरी दुनिया देख रही है और हमारी वैश्विक छ’वि खराब हो रही है. आप लि’चिंग के बारे में सुनते हैं, लोगों को पक’ड़कर मा’र दिया जाता है. ये हमारी छवि है.”लेकिन, ऐसा भी मानना है कि चुनावी डॉक्यूमेंट में कश्मीर और एनआरसी का ज़िक्र होना सिर्फ़ चुनावी चर्चा भी हो सकती है.

इस पर अपर्णा पांडे कहती हैं, “लोग चुनावी अभियान के दौरान बहुत कुछ कहते हैं जो वो राष्ट्रपति बनने के बाद नहीं करते. जब दुनिया में इतना कुछ हो रहा है तो विदेश नीति में आप कितना बदलाव ला सकते हैं. ये सात दशकों से लंबित मुद्दों की तुलना में आपका ज़्यादा समय ले लेगा.”

हैरिस के भारत कनेक्शन को लेकर चिंता?

हैरिस की मां का जन्म भारत में हुआ था और वो अपनी भारतीय विरासत के बारे में बात करती आई हैं. यह पाकिस्तान में विश्लेषकों के एक वर्ग के बीच कुछ चिं’ता पैदा कर रहा है.

अमरीका में 35 साल बिताने वाले वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषक फैज़ रहमान कहते हैं, “अगर कोई पहले से भारतीय है तो वो भारत समर्थक और पाकिस्तान विरो’धी होगा. लेकिन, यहां रहने वाले बहुत से पाकिस्तानी इस तरह नहीं सोचते.”फैज़ रहमान कहते हैं, “(उप राष्ट्रपति का पद) प्रती’कात्मक होता है. सारी शक्ति राष्ट्रपति के हाथ में होती है. ऐसा कहा जाता है कि क्योंकि बाइडेन की उम्र ज़्यादा है तो ऐसे में उप राष्ट्रपित के लिए ज़्यादा मौका हो सकता है.”

हालांकि, कांग्रेशनल पाकिस्तान कॉकस फाउंडेशन के संस्थापक सदस्य और डेमोक्रेट नेता ताहिर जावेद हैरान नहीं हैं.वह कहते हैं, “वो मेरी भी उप राष्ट्रपति हैं. जब भी मानावधिकार उल्लं’घन होगा तो वो आवाज़ उठाएंगी.”मैंने जिन पाकिस्तानी और भारतीय अमरीकियों से बात की तो उनका कहना था कि वो हैरिस के नामांकन से खुश हैं.पाकिस्तानी अमरीकन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी के डॉक्टर राव कामरान अली कहते हैं, “मेरी बेटी बहुत खुश है. अगर कमला कर सकती हैं, तो वो राष्ट्रपति भी बन सकती हैं. मेरी बेटी के लिए सुज़ैन राइस की तुलना में कमला हैरिस से प्रेरणा लेना ज़्यादा आसान है.”