जितिन प्रसाद के BJP में शामिल होने पर कांग्रेस के बड़े नेताओं ने कही ये बात

जितिन प्रसाद के बीजेपी में शामिल होने पर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि किसी को कोई रोक नहीं सकता है. जाने वाले जाते रहते हैं. यह उनका फैसला था, उनका यहां (कांग्रेस पार्टी) भविष्य भी था. हालांकि, यह दुर्भा’ग्यपूर्ण है.

वहीं उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने कहा कि जितिन प्रसाद को मान सम्मान कांग्रेस पार्टी ने दी. उनको सांसद बनाया. दो बार केंद्रीय मंत्री बनाया. 2017 के विधानसभा चु’नाव में प्रत्याशी बनाया. 2019 में भी उनको चु’नाव ल’ड़ाया गया और अभी हा’ल ही में बंगाल जैसे महत्वपूर्ण राज्य का उनको प्रभारी बनाया.

उन्होंने आगे कहा, ”इतना मा’न सम्मान देने के बाद भी अगर कोई नेता पार्टी के साथ वफा’दारी नहीं करे तो यही विश्वा’सघा’त है. मैं समझता हूं कि किसी के आने जाने से फ’र्क नहीं प’ड़ता है. कांग्रेस विचारधारा की पार्टी है. कांग्रेस पार्टी कि’सान, गरीब, युवाओं की आवाज को उठाती रहेगी.”

‘सिंधिया के बाद प्रसाद का जाना कांग्रेस के लिए बड़ा झ’टका’

हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बिश्नोई ने ट्वीट किया, ‘‘पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया … और अब जितिन प्रसाद …. कांग्रेस के लिए यह बड़ा झ’टका है क्योंकि हम उन नेताओं को खो रहे हैं जिन्होंने पार्टी को दिया और आगे भी दे सकते थे.’’

उन्होंने यह भी कहा, ‘‘इससे मैं सहमत हूं कि उन्हें कांग्रेस को, खासकर इस मु’श्किल समय में नहीं छो’ड़ना चाहिए था. परंतु कांग्रेस को जन नेताओं की पहचान करके उन्हें मजबूत करना चाहिए ताकि राज्यों में फिर से जीत हासिल की जा सके.’’

कौन हैं जितिन प्रसाद?: जितिन प्रसाद एक समय कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे जितेंद्र प्रसाद के बेटे हैं। हालांकि, खुद जितेंद्र प्रसाद भी एक समय सोनिया गांधी के लिए चु’नौती पैदा करते हुए ज’बरदस्त विरो’ध कर चुके थे। 1998 में जब सोनिया गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव ल’ड़ा तो जितेंद्र प्रसाद उनके खि’लाफ ख’ड़े हो गए। हालांकि तमाम विरो’ध के बाद भी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया ही बनीं। कांग्रेस ने आगे चलकर जितिन प्रसाद को पहले सांसद फिर मनमोहन सरकार में मंत्री भी बनाया।

जी-23 के नेताओं में शामिल रहे थे जितिन प्रसाद: गौरतलब है कि जितिन प्रसाद उन नेताओं में शामिल रहे हैं, जिन्होंने पिछले साल कांग्रेस में हर स्तर पर ब’दलाव की मांग करते हुए पार्टी आलाकमान को चिट्ठी लिखी थी। हालांकि, उनकी और बाकी 22 नेताओं की चिट्ठी पर कोई बड़ा ब’दलाव नहीं हुआ। इसके बजाय जितिन प्रसाद को बंगाल में पार्टी का प्रभारी बनाकर भेजा गया, ताकि उन्हें मनाया जा सके।