बड़ी ख़बर: इ’जरायल-फि’लीस्तीन के बी’च रुकी ल’ड़ाई, हमा’स कर रहा है जीत का दावा !

संघर्षविराम के लागू होते ही बड़ी संख्या में फ़लस्तीनी लोग ग़ज़ा में सड़कों पर उतर जश्न मनाने लगे. हमास ने चेतावनी दी है कि “उसके हाथ ट्रिगर से हटे नहीं हैं”, यानी वो हमले की स्थिति में जवाब देने के लिए तैयार है.दोनों पक्षों ने 11 दिन की लड़ाई के बाद आपसी सहमति से संघर्षविराम का फ़ैसला किया. इस दौरान 240 से ज़्यादा लोग मारे गए जिनमें ज़्यादातर मौतें ग़ज़ा में हुईं.इसराइली कैबिनेट ने इससे कुछ घंटे पहले आपसी सहमति और बिना शर्त के युद्धविराम के फ़ैसले पर मुहर लगा दी.

कैसे हुआ युद्धविराम

दोनों पक्षों के बीच पिछले की दिनों से लड़ाई बंद करने के लिए अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता जा रहा था.बुधवार को अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू से कहा कि “उन्हें अपेक्षा है कि आज ग़ज़ा में जारी लड़ाई में “ठोस कमी” आएगी जिससे युद्धविराम का रास्ता निकल सके”.

मिस्र, क़तर और संयुक्त राष्ट्र ने भी इसराइल और हमास के बीच मध्यस्थता करने में अहम भूमिका निभाई.मिस्र के सरकारी टीवी पर बताया गया कि राष्ट्रपति अब्दुल फ़तह अल-सीसी ने संघर्षविराम करवाने के लिए दो सुरक्षा प्रतनिधिमंडलों को इसराइल और फ़लस्तीनी क्षेत्रों में भेजा है.

संघर्षविराम के बारे में किसने क्या कहा?

इसराइल की राजनीतिक सुरक्षा कैबिनेट ने कहा कि उसने संघर्षविराम के “प्रस्ताव को एकमत से स्वीकार” कर लिया है.उसने कहा, “राजनीतिक समूह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ज़मीनी हक़ीक़त से तय होगा कि अभियान को जारी रखना है या नहीं.”इसराइल के रक्षा मंत्री बेनी गैंट्ज़ ने ट्विटर पर कहा कि ग़ज़ा अभियान से “अभूतपूर्व सैन्य लाभ” हुआ है.हमास के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा कि इसराइर की युद्धविराम की घोषणा फ़लस्तीनी लोगों की एक “जीत” है, और इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू की हार.हमास नेता अली बराकेह ने कहा कि हमास के चरमपंथी तब तक चौकस रहेंगे जब तक कि मध्यस्थ इस संघर्षविराम के ब्यौरे को अंतिम रूप नहीं दे देते.