इजराइली PM नेतन्याहू और प्रिंस जायद नोबेल शांति पुरस्कार के लिए हुए नॉमिनेट

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बाद अब इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) और आबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (Mohammed bin Zayed Al Nahyan) को भी नोबेल पीस प्राइज के लिए नॉमिनेट किया गया है.

दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध स्थापित करने के उद्देश्य से दोनों नेताओं द्वारा किए गए कार्यों को लेकर उनका नाम नोमिनेट किया गया है. रूसी न्यूज़ एजेंसी स्पूतनिक ने इजरायली प्रधानमंत्री के कार्यालय के ह’वाले से इस बात की जानकारी दी है.

इजरायली पीएम के कार्यालय के अनुसार, ‘नोबेल प्राइज विजेता लॉर्ड डेविड ट्रिम्बले ने आज आबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायेद के साथ प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की उम्मीदवारी दर्ज कर दी है.’ स्पूतनिक के मुताबिक ट्रिम्बले उत्तरी आयरलैंड के मंत्री हैं, जिन्होंने देश में संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए किए गए प्रसायों के लिए 1998 में नोबेल शांति पुरस्कार जीता था.

इसके बाद से उनको इस अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार के लिए अन्य उम्मीदवारों को चुनने का विशेषाधिकार प्राप्त है. नोबेल प्राइज कमिटि नेतन्याहू और अल नहयान की उम्मीदवारी की समीक्षा करेगी.

बता दें कि 15 सितंबर को, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात के बीच शांति समझौते की नींव रखने के लिए व्हाइट हाउस में एक हस्ताक्षर समारोह की अध्यक्षता की थी.

दो खाड़ी देशों, बहरीन और यूएई द्वारा हस्ताक्षर किए गए अब्राहम समझौते (Abraham Accord) के अनुसार, अब वो इजरायल के साथ पूर्ण संबंध रखने वाले अरब राष्ट्र हैं. इससे पहले मिस्त्र और जॉर्डन ही इस लिस्ट में थे.

उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति स्थापित करने के लिए ट्रंप से ज्यादा प्रयास इस पुरस्कार के लिए नामित किसी अन्य सदस्य ने नहीं किए हैं. जब भी किन्ही दो देशों के बीच वि’वाद की स्थिति बनी तो ट्रंप ने इसे सुलझाने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की, वही इस पुरस्कार के असली हकदार हैं. ट्राइबिंग के मुताबिक इस पुरस्कार को पाने की तीनों पात्रताएं डोनाल्ड ट्रंप ने पूरी की है.

उन्होंने अन्य देशों के साथ किसी भी तरह के सशस्त्र संघर्ष को बढ़ावा नहीं दिया और ना ही किसी तरह के युद्ध की पहल की है. उन्होंने बातचीत के जरिए समस्या का निप’टारा करने की कोशिश की है. उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप ने मध्य पूर्व के देशों में नाटो और अमेरिकी सैनिकों की संख्या कम की है.