राज्यसभा में गुलाम नबी आज़ाद को सुनते रह गए नरेन्द्र मोदी, कहा-किसानों के सामने तो अंग्रेजों को भी…

दिल्ली की सीमाओं पर किसान आं’दोलन जारी हो तो वहीं संसद भवन में भी किसानों का मु’द्दा गूंज रहा है। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आज़ाद ने ‘बड़े टिकैत’ यानी महेंद्र टिकैत का नाम लेकर मोदी सरकार को नि’शाने पर लिया। उस दौरान सदन में पीएम मोदी भी मौजूद थे। आज़ाद ने कहा, किसानों के सा’मने तो ब्रिटिश सरकार को भी झु’कना प’ड़ा था। अगर इन कानूनों को किसान पसंद नहीं कर रहे तो इन्हें त’त्काल वापस ले लेना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने कहा, पहले भी किसानों के लिए कानू’न बनाए गए लेकिन अगर उन्हें पसंद नहीं आए तो वापस ले लिए गए। इस बार भी सरकार को किसानों की सुननी चाहिए और उनसे ल’ड़ाई नहीं छे’ड़नी चाहिए। उन्होंने कहा, ल’ड़ना है तो चीन और पाकिस्तान से ल’ड़ो, किसानों से ल’ड़कर कुछ नहीं मिलेगा। बता दें कि संसद में किसान आं’दोलन पर चर्चा के लिए 15 घंटे का समय तय किया गया है।

गुलाम नबी आज़ाद ने कहा, जय जवान, जय किसान का ना’रा आज भी उतना ही ज़रूरी है जितना पहले थे। उन्होंने कहा, ‘1988 में कांग्रेस पार्टी ओखला में एक रैली करना चाहती थी। राजीव गांदी प्रधानमंत्री थे। मैं इस रैली को आयोजित कर रहा था। उसी दौरान महेंद्र टिकैत जी का आं’दोलन चल रहा था।

हमारी रैली बोट क्लब में होनी थी और टिकैत जी खाट और आनाज लेकर वहीं आकर बैठ गए। बात उठी कि किसानों को वहां से नि’काला जाए लेकिन मैंने इनकार कर दिया। फैसला ब’दला गया कि बोट क्लब की बजाये लालकिले जाना है। हमने अटै’क नहीं किया। कुछ दिन बाद टिकैत जी ने खुद ध’रना उठा लिया।’

उन्होंने संसद में दिल्ली में हुई हिं’सा का भी जिक्र करते हुए कहा कि बहुत सा’रे लोग अब भी गा’यब हैं। ऐसे में सरकार को एक कमिटी बनाकर इसकी जांच करवानी चाहिए। उन्होंने कहा कि लालकिले पर उसदिन जो कुछ हुआ वह ठीक नहीं था। तिरंगे का अपमान बर्दा’श्त नहीं किया जा सकता। जहां प्रधानमंत्री ख’ड़े होकर भाषण देते हैं, उस जगह पर इस तरह की ह’रकत नहीं होनी चाहिए।