बंगाल में NDA को बड़ा झटका- GJM ने छोड़ा साथ, ममता संग चुनाव ल’ड़ने का ऐलान

बिहार विधानसभा चुनाव के बीच भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली एनडीए को एक और झटका लगा है. गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (GJM) के नेता बिमल गुरुंग, जो पिछले तीन सालों से फ’रार चल रहे थे, वह आज बुधवार को अ’चानक कोलकाता में दिखाई दिए और ऐलान किया कि वह एनडीए छोड़ रहे हैं और 2021 में बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस के साथ गठबंधन कर रहे हैं.

बिमल गुरुंग कोलकाता के साल्ट लेक क्षेत्र में गोरखा भवन के बाहर देखे गए. वह यहां पहले गोरखा भवन के अंदर गए जहां बाहरी लोगों के लिए प्रवेश की अनुमति नहीं थी. इसके बाद उन्होंने आ’रोप लगाया कि बीजेपी ने राज्य के लिए कुछ नहीं किया. गोर’खालैं’ड को लेकर हमारी सारी मांगें पूरी नहीं की गईं.

बिमल गुरुंग ने भारतीय जनता पार्टी पर वा’दाखिला’फी का आ’रोप लगाते हुए कहा, ‘बीजेपी ने जो वादा किया था, उसे पूरा नहीं किया, लेकिन ममता बनर्जी ने अपने किए सभी वादों को पूरा किया. इसलिए मैं खुद को एनडीए से अलग करना चाहूंगा.’

बिमल गुरुंग पर राज्य के कलिम्पोंग पु’लिस स्टेशन पर ग्रेनेड हम’ले और दार्जिलिंग के चौ’क बाजार क्षेत्र में 2017 में ध’मा’का करने के संबंध में अन’लॉ’फुल ए’क्टिवि’टीज (प्रि’वें’शन) एक्ट U’AP’A के तहत आ’रोप लगाए गए थे और तब से वह फ’रार चल रहे थे.

‘PM मोदी-शाह ने वादा पूरा नहीं किया’

गोरखा जनमुक्ति मो’र्चा के नेता ने आज प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर हम’ला बोलते हुए कहा कि ये लोग बंगाल में गोरखा के साथ किए गए वादों को पूरा करने में ना’काम रहे हैं. उन्होंने साफ किया कि उनकी पार्टी ने एनडीए का साथ छोड़ दिया है.

बिमल गुरुंग ने कहा, ‘बीजेपी ने कहा था कि वह दार्जिलिंग हिल्स के लिए एक स्थायी राजनीतिक समाधान खोजेगी और 11 गोरखा समुदायों को अनु’सूचित जनजाति के रूप में मान्यता देगी, लेकिन पार्टी अपना वादा निभाने में विफल रही.’ उन्होंने यह भी कहा कि जीजेएम अभी भी गोरखालैंड को लेकर प्रतिबद्ध है और हम उस पार्टी का समर्थन करेंगे जो 2024 के लोकसभा चुनावों में इस मुद्दे को उठाएगी.

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में हम तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के साथ गठबंधन करेंगे और बीजेपी को क’रारा जवाब देंगे. बिमल गुरुंग के इस फैसले के बाद माना जा रहा है कि उत्तरी बंगाल के पहाड़ी क्षेत्रों में कम से कम 10 सीटों पर बीजेपी के वोटबैंक पर असर पड़ सकता है. बता दें कि इससे पहले एलजेपी ने बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ने का ऐलान किया था.