आं’दोलन के बीच सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को झाड़ा, कृषि कानूनों को लेकर कह दी ये बात

केंद्र सरकार के लाए तीन कृषि कानू’नों के खि’लाफ अ’ड़े अन्नदाताओं के आंदोलन के बीच सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इस म’सले पर सुनवाई हुई। टॉप कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार से दो टू’क कहा कि इन कानू’नों को अमल में लाने पर रो’क लगाएं, वरना कोर्ट खुद ऐसा कर देगा।

सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि नए कृषि कानू’नों को लेकर जिस तरह से सरकार और किसानों के बीच बातचीत चल रही है, उससे हम बे’हद नि’राश हैं। कोर्ट ने आगे यह भी पूछा- कुछ लोगों ने खु’दकुशी कर ली। बुजुर्ग और महिलाएं भी इस आं’दोलन का हिस्सा हैं। क्या चल रहा है? राज्य आपके कानू’नों के खि’लाफ ब’गावत कर रहे हैं।

कोर्ट बोला, “हम फिलहा’ल इन कृषि कानू’नों को निरस्त करने की बात नहीं कर रहे हैं, यह एक बहुत ही ना’जुक स्थिति है। हमें नहीं मालूम कि आप (केंद्र) ह’ल का हिस्सा हैं या फिर समस्या का। हमारे पास एक भी ऐसी याचिका नहीं है, जो कहती हो कि ये कानू’न किसानों के लिए फायदेमंद हैं।”

कोर्ट ने कहा कि वह चाहता था कि बातचीत से मा’मले का ह’ल निकले, लेकिन कृषि कानू’नों पर फिलहाल रो’क लगाने को लेकर केंद्र की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। इन कानू’नों को लेकर समिति की जरूरत को दोहराया और कहा कि अगर समिति ने सुझाव दिया तो, वह इसके अमल पर रो’क लगा देगा।

कोर्ट ने कृषि कानू’नों के खि’लाफ प्रदर्श’न कर रहे किसान सं’गठनों से कहा, ‘‘आपको भरोसा हो या नहीं, हम भारत की शीर्ष अ’दालत हैं, हम अपना काम करेंगे।’’ कोर्ट के मुताबिक, ‘‘हमें नहीं पता कि लोग सामाजिक दूरी के नियम का पालन कर रहे हैं कि नहीं लेकिन हमें उनके (किसानों) भोजन-पानी की चिंता है। हम अर्थव्यवस्था के विशेषज्ञ नहीं हैं। आप बताएं कि सरकार कृषि कानू’न पर रो’क लगाएगी या हम लगाएं।’’

न्यायालय ने आगे कहा- किसान कानू’नों के खि’लाफ प्रदर्श’न कर रहे हैं, उन्हें समिति को अपनी आ’पत्तियां बताने दें। हम समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर सकते हैं। हमें यह कहते हुए काफी खेद है कि केंद्र इस समस्या और किसान प्रदर्श’न का समाधान नहीं कर पाई। हालां’कि, अटॉर्नी जनरल केके. वेणुगोपाल ने कोर्ट से कहा, किसी कानू’’न पर तब तक रोक नहीं लगाई जा सकती, जब तक वह मौलिक अधिकारों या संवै’धानिक योजनाओं का उल्लं’घन ना करें।

जानिए, सुप्रीम सुनवाई की बड़ी बातेंः

– स्थिति संभालने में केंद्र नाकाम- SC

– 1 कमेटी बनाने पर विचार कर रहा कोर्ट

– कानून नहीं, अमल पर रोक लगाएंगे- कोर्ट

– किसान रामलीला मैदान जाने को राजी- दुष्यंत दवे

– 26 जनवरी की परेड को बाधित न करेंगे किसानः दवे

बता दें कि केंद्र और किसान सं’गठनों के बीच सात जनवरी को हुई आठवें दौर की बाचतीच में भी कोई समाधान नि’कलता नजर नहीं आया क्योंकि केंद्र ने वि’वादास्पद कानू’न निरस्त करने से इनकार कर दिया था जबकि किसान नेताओं ने कहा था कि वे अं’तिम सांस तक ल’ड़ाई ल’ड़ने के लिये तैयार हैं और उनकी “घर वापसी” सिर्फ “कानू’न वापसी” के बाद होगी। सरकार और किसान नेताओं के बीच 15 जनवरी को अगली बैठक प्रस्तावित है।