ईद-उल-फितर की नमाज लेकर दो शाही इमामों ने मुस्लिमों समुदाय से की ये अपील

दिल्ली की दो ऐतिहासिक मस्जिदों के शाही इमामों ने सोमवार को अलग अलग वीडियो जारी कर मु’स्लिम समुदाय से कोरोना वायरस महामा’री की वजह से आगामी ईद -उल-फितर की नमाज घर में ही अदा करने की अपील की।

जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी और चांदनी चौक स्थित फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम अहमद ने वीडियो में मु’सलमानों से अपील की है कि वे कोविड-19 की स्थिति को देखते हुए ईद की नमाज घर में ही पढ़ें।

ईद का त्यौहार गुरुवार या शुक्रवार को प’ड़ सकता है जो चांद नजर आने पर निर्भर करता है। बुखारी ने एक वीडियो में कहा, इस वक्त कोरोना वायरस वबा (महामा’री) की शक्ल में पूरे मुल्क में तेजी से फै’ल चुका है और यह वा’यरस बड़ी संख्या में लोगों को अपनी चपे’ट में ले रहा है। यह ऐसा कयामत (प्रलय) का मं’जर है जो हमने और आपने अपनी जिंदगी में कभी नहीं देखा।

उन्होंने कहा, विशेषज्ञों के मुताबिक,कोरोना वायरस की तीसरी लहर का ख’तरा भी है और लिहाजा 13 या 14 मई को ईद-उल-फितर है और हा’लात की नज़ाकत को देखते हुए मेरी अपील है कि ईद की नमाज़ अपने घरों में ही पढ़ी जाए तो बेहतर है। उन्होंने कहा कि इस तरह के हा’लात में शरीयत (इस्लामी कानून) घर में नमाज पढ़ने की इजाजत देती है।

वहीं फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम ने अलग वीडियो में कहा, कोरोना वायरस की दूसरी लहर चल रही और रोज लाखों मा’मले सामने आ रहे हैं, हजारों लोगों की मौ’त हो रही है। हा’लात के मुताबिक, बहुत ज्यादा एहतियात करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, डॉक्टरों और विशेषज्ञों का कहना है कि यह लहर अभी और तेज़ी अख्तियार करेगी। इसी वजह से लॉकडाउन लगाया गया है।

मुफ्ती मुकर्रम ने कहा, रमजान में हमने घरों में रहकर इ’बादत की। पिछले साल हमने घरों में ही ईद की न’माज अदा की थी। बीमारी का ड’र अब भी मौजूद है तथा सं’क्रमण बहुत ज्यादा है। लिहाजा सभी लोगों से अपील करूंगा कि ईद वाले दिन भी मस्जिद की तरफ न आएं बल्कि घरों में ही इबादत करें। शरीयत में इसकी इजाजत मौजूद है।

उन्होंने कहा, जो लोग ईद के दिन मस्जिद में नमाज अदा न कर सकें वे घर में सुबह के वक्त चार रकात नमाज़ ‘नफील’ पढ़ें और फिर ‘तकबीर’ पढ़ें और अल्लाह से दुआ करें। मुफ्ती मुकर्र’म ने लोगों से सदका-ए-फित्र (दान) अदा करने की अपील करते हुए समुदाय के लोगों से गरीबों की, खासकर, कोरोना वायरस से सं’क्रमित लोगों की ‘दिल खोलकर’ मदद करने की गु’जारिश की।

मु’सलमानों के लिए अभी इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना ‘रमजान’ चल रहा है जिसमें समुदाय के लोग रोजा (व्रत) रखते हैं। यह महीना ईद का चांद नजर आने के साथ ख’त्म होता है। इस्लामी कैलेंडर में एक महीना 29 या 30 दिन का होता है और यह चां’द पर निर्भर करता है।

बता दें कि जामा मस्जिद का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने कराया था जबकि फतेहपुरी मस्जिद का निर्माण उनकी एक पत्नी फतेहपुरी बेगम ने कराया था।