सीमा विवा’द में नया मोड़, चीन ने पैंगॉन्ग झील से हटने पर किया साफ़ इंकार

भारत और ची’न के बीच सीमा विवा’द को लेकर गतिरोध जारी है. व्यावहारिक रूप से देखा जाए तो चीन पैंगॉन्ग झील को लेकर बातचीत से क’न्नी का’ट रहा है. बातचीत इसी प्वाइंट को लेकर होनी है, लेकिन चीन ने इसे खा’रिज किया है. पता चला है कि 14-15 जून को हुई चौथे दौर की वार्ता के दौरान यह बात उभर कर सामने आई थी कि चीन पैंगॉन्ग त्सो पर बातचीत करने को लेकर इच्छुक नहीं है. फिलहाल पैंगॉन्ग त्सो वि’वाद का केंद्र बना हुआ है.

सरकार के नीतिकारों का मानना है कि राजदूत सुन वीडॉन्ग ने शी जिनपिंग और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की उस मं’शा को साफ किया है कि चीनी सेना पैंगोंग झील से नहीं हटने जा रही। पूर्व सेना प्रमुख जनरल (रिटा.) वेद मलिक ने शुक्रवार को कहा कि चीनी राजदूत के बयान ने एलएसी पर कोर कमांडर बातचीत से किसी प्रगति की उम्मीद को लगभग ख’त्म कर दिया है।

उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि अगर ची’न पैंगोंग से नहीं ह’टने पर वाकई आमादा है तो भारत  के सामने दो विकल्प होंगे। पहला, सेना ची’न के अगले पैंतरे को रोक’ने को वहीं जमी रहे। दूसरा, अपनी जमीन से चीनियों को भगा’ने के लिए जं’ग का रास्ता अपनाए।

चीनी राजदूत ने क्या कहा था

राजदूत वीडॉन्ग ने इंस्टीट्यूट ऑफ चाइनीज स्टडीज के मंच पर कहा है कि पैंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर चीन की पारंपरिक सी’मा रेखा एल’ए’सी के मुताबिक है। लिहाजा ऐसी कोई बात नहीं है कि चीन ने वहां की जमीन पर अपनी नई दावेदारी दिखाई है।

सूत्रों ने बताया कि राजदूत का कहना है कि चीन फिंगर पॉइंट 4 को अपनी सीमा मानता है, जबकि अब तक फिंगर पॉइंट 8 तक भारत के हिस्से में था। चीनी सेना इन्हीं पॉइंट 4 से  8 के बीच के करीब 8 वर्ग किमी जमीन पर बैठा है। रणनीतिकारों के मुताबिक चीन पैंगोंग पर अपनी जिद पर अ’ड़ा रहा तो त’नाव किसी भी ह’द तक बढ़ सकता है।

पैंगॉन्ग त्सो पर ची’न के रुख से लगा था कि चीनी सेना ने गलवान घाटी के दक्षिण में हॉट स्प्रिंग्स सेक्टर में पेट्रोल प्वाइंट 14 और पेट्रोल प्वाइंट 15 पर डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया को माना है. गोगरा पोस्ट को छोड़कर पेट्रोल प्वाइंट 17ए पर उनकी तैनाती कम हुई है. लेकिन पैंगॉन्ग पर चीनी सेना की तैनाती भारत के लिए अब तक चिंता का सबब बना हुआ है. वार्ता के दौरान ची’न की जिद मई पूर्व की स्थिति पर उसकी मं’शा को जाहिर करती है.

बताते चलें कि पिछले सप्ताह दो घ’टनाक्रम देखने को मिले. पहला चीनी राजदूत ने कहा कि डिसएंगेजमेंट की प्रक्रिया पूरी हो गई है और चीन पैंगॉन्ग फिंगर कॉम्पलेक्स पर अपनी लाइन पर है. इसका सीधा संकेत था कि चीन इस मसले पर अब त’नाव को और बढ़ाना नहीं चाहता है.  चीन ने मई की शुरुआत में ही विवा’दित फिंगर 4-8 पर भा’री तै’नाती की थी. हालांकि इस स्थिति बहुत मा’मूली बदलाव दिख रहे हैं.

ची’न ने पिछले तीन हफ्तों में पैंगॉन्ग के निचले इलाकों में निर्माण करने के साथ साथ अक्साई चिन में कई आ’पूर्ति ठिकानों को स’क्रिय किया है ताकि संक्षेप सूचना पर उसके जवान एक्शन में आ जाएं. लिहाजा भारतीय सेना पैंगॉन्ग मसले पर बातचीत करने को लेकर ची’न की अनिच्छा को हल्के में नहीं ले रही है, और साफ तौर से बता दिया है कि इस पर विस्तार से च’र्चा के बिना आगे नहीं बढ़ा जाएगा. भारतीय सेना के लेह कॉर्प्स कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हरिन्दर सिंह और उनके चीनी समकक्ष मेजर जनरल लिन लियू के बीच रविवार की पांचवें दौर की वार्ता को लेकर शनिवार देर शाम चीनी पक्ष ने पुष्टि की.

भारत-ची’न सेना में क’ड़वाहट

बता दें कि पिछले तीन महीनों में भारत-तीन के सैन्य संबंधों में क’ड़वाहट आई है. शनिवार 1 अगस्त, पीपु’ल्स लिब’रेशन आ’र्मी (पीए’लए) दिवस था. लिहाजा, चुशुल में पीएलए दिवस पर होने वाली पारंपरिक औपचारिक भारत-चीन सीमाकर्मियों की बैठक (बीपीएम) शनिवार को नहीं हुई. पूर्वी कमान के तहत इधर से शुभकामनाएं दी गईं, लेकिन कोरो’ना प्रोटोकॉल के चलते किसी उपहार का लेनदेन नहीं हुआ.

डेपसांग का मुद्दा

पैंगॉन्ग गति’रोध के अलावा, आज की वार्ता में चर्चा का अन्य प्रमुख विषय डेपसांग का मुद्दा है. जून के अंत में, इंडिया टुडे ने बताया था कि कैसे ची’न उत्तरी लद्दाख के डेपसांग-डीबीओ सेक्टरों में एक नया मो’र्चा खोलने की फि’राक में है. हालांकि डेपसांग का विवा’द लंबे समय से चल रहा है, लेकिन लद्दाख में जून में हुई घ’टना से उसका सीधा कुछ लेना देना नहीं है. लेकिन घटनाक्रम जिस तरीके से सामने आए हैं उससे जरूरी हो गया है कि इस मसले को भी वार्ता के केंद्र में लाया जाए.

डेपसांग में भारत से लगी सी’मा पर ची’न ने पहले के मुकाबले अपने जवानों की तैनाती ज्यादा बढ़ा दी है. चीनी वाहनों की आवाजाही बढ़ गई है. हालांकि यह वर्षों से होता रहा है. भारतीय सैनिक आमतौर पर उन्हें भगाते रहे हैं. लेकिन इस साल उनकी (चीनी सेना) संख्या में वृद्धि हुई है और उनके वाहनों की आवाजाही बढ़ी है.

पिछली बार की वार्ता में भारत ने जब डेपसांग का मसला उठाया तो चीन ने आ’रोप लगाया था कि भारतीय सेना की पेट्रोलिंग टीम उसकी सीमा में पहुंच गई थी. सरल भाषा में कहें तो इस साल डेपसांग में विवा’द की आंच बढ़ने वाली है.