हाथरस कां’ड : झलका परिवार का द’र्द बोले – बीजेपी सरकार से नहीं इंसाफ की उम्मीद, सीएम योगी की चुप्पी पर उठाए सवाल

हाथ’रस गैं’ग’रे’प पी’ड़ि’ता के भाई ने पु’लिस पर कई गं’भीर आ’रोप लगाए हैं. पी’ड़ि’ता के भाई ने राज्य की बीजेपी सरकार पर भी निशा’ना सा’धा.पी’ड़ि’ता के भाई कहते हैं कि उनको (पी’ड़ि’ता) नॉर्मल वार्ड में रखा गया था. हमें यूपी सरकार से इं’साफ की कोई उम्मीद नहीं है. बीजेपी सर’कार घटना पर कुछ भी नहीं बोली है. न ही सीएम यो’गी आदित्यनाथ ने कुछ बोला है. परिजनों का कहना है कि उन्हें न्याय चाहिए. आरो’पियों को फां’सी की सजा हो.

उन्होंने कहा कि पु’लिस ने दीदी के लिए एंबु’लें’स भी नहीं मंगाई थी. बहन जमीन पर लेटी हुई थी. पु’लिसवालों ने कह दिया था कि इन्हें यहां से ले जाओ. ये बहाने बनाकर लेटी हुई है.

पी’ड़ि’ता के परिजन दिल्ली के सफ’दरजं’ग अस्प’ता’ल में ध’रने पर बैठे थे. पु’लिस यहां से भी उन्हें अपने साथ ले गई. परिजन सफदरजं’ग हॉस्पिट’ल पर भी आ’रोप लगा रहे हैं. पी’ड़ि’ता के भाई ने कहा कि पोस्ट’मॉ’र्टम हो चुका है, लेकिन श’व हमें नहीं सौंपा गया है. हमें कोई रि’पोर्ट भी नहीं दी गई है.

उन्होंने कहा कि F’IR के लिए हमें 8-10 दिन तक इंतजार करना पड़ा था. रि’पोर्ट द’र्ज कराने के बाद पु’लिस एक आ’रोपी को पकड़ती थी और दूसरे को छोड़ देती थी. ध’रना-प्र’दर्शन के बाद आगे की कार्र’वाई हुई और आरो’पियों को घ’टना के 10-12 दिन बाद पकड़ा गया.

पी’ड़ि’ता के भाई ने कहा कि पु’लिसवालों ने एंबु’लें’स नहीं मंगाई. बहन जमीन पर ले’टी हुई थी. पु’लिसवालों ने कह दिया था कि इन्हें यहां से ले जाओ. ये बहाने बनाकर लेटी हुई है.

पी’ड़ि’ता के भाई ने कहा कि 10 से 15 दिन तक तो दीदी की ब्ली’डिं’ग रुकी तक नहीं थी. 22 सितंबर के बाद उन्हें अच्छा इला’ज मिलना शुरू हुआ. उनके साथ ला’परवाही बरती गई. उन्हें ठीक से इला’ज नहीं दिया गया.

अलीगढ़ के डॉक्टर ने क्या कहा

पी’ड़ि’ता अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज से ही दिल्ली के सफद’रजं’ग हॉ’स्पिट’ल रेफर की गई थी. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जेएन मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल के डॉ एमएफ हुड्डा ने बताया कि पी’ड़ि’ता को 14 सितंबर की रात को हमा’रे अस्पताल लाया गया था. उनके शरीर पर काफी चो’ट थी. उनकी रीढ़ की हड्डी टू’ट गई थी, जिसके परिणामस्वरूप पूरे शरीर को लक’वा मा’र गया था. डॉ एमएफ हुड्डा ने कहा कि पी’ड़ि’ता बेहो’श थीं. वह आईसीयू में वें’टिलेटर पर थीं. हम उन्हें हर संभव उपचार दे रहे थे.