बंगाल विधानसभा चुनाव 8 चरण में कराए जाने को चुनौती, SC ने दिया ये जवाब

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चु’नाव आठ चरण में करवाए जाने को चुनौ’ती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खा’रिज कर दी है. याचिका में कहा गया था कि पश्चिम बंगाल के साथ चार और राज्यों में चु’नाव होने हैं, लेकिन उनमें मतदान का कार्यक्रम इतना विस्तृत नहीं रखा गया है. चु’नाव आयोग ने बिना कोई उचित कारण बताए पश्चिम बंगाल में चु’नाव की अवधि बाकी राज्यों से अधिक रखी है.

वकील मनोहर लाल शर्मा की इस याचिका में राज्य में चु’नाव प्रचार के दौरान जय श्रीराम के ना’रे लगाए जाने पर भी आप’त्ति जताई गई थी. याचिका के मुताबिक इस तरह के ना’रे लगाना धार्मिक आ’धार पर वो’ट मांगना है. सुप्रीम कोर्ट खुद इसके खि’लाफ फैसला दे चुका है. याचिकाकर्ता ने इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और हाल ही में बीजेपी में शामिल हुए शुभेंदु अधिकारी के खि’लाफ सीबीआई जांच की मांग की थी.

हाई कोर्ट में याचिका क्यों नहीं दाखिल की?- सुप्रीम कोर्ट

आज यह मा’मला चीफ जस्टिस एस ए बोबड़े, जस्टिस ए एस बोपन्ना और वी रामसुब्रमण्यम की बें’च में लगा. बेंच ने सबसे पहले याचिका के पहले बिंदु पर सवाल किया. चीफ जस्टिस ने पूछा कि चु’नाव प्रक्रिया से अगर कोई समस्या है तो इसके लिए हाई कोर्ट में याचिका क्यों नहीं दाखिल की? याचिकाकर्ता ने जवाब दिया कि सुप्रीम कोर्ट पहले कह चुका है कि चु’नाव की अधिसूचना जारी होने के बाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल नहीं हो सकती. इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, “आपकी याचिका चु’नाव याचिका नहीं है. हमें नहीं लगता कि हमने कोई ऐसा फैसला दिया है जो चु’नाव नोटिफिकेशन जारी होने के बाद हाई कोर्ट में जनहित याचिका करने से रोकता हो.”

 

जजों ने याचिकाकर्ता को वक्त देने से किया इनकार

याचिकाकर्ता ने मोहिंदर सिंह गिल मा’मले में दिए फैसले का हवा’ला दिया. इस पर जजों ने उनसे फैसले का वह हिस्सा दिखाने को कहा कि जो उन्हें हाई कोर्ट जाने से रो’कता हो. वकील यह दिखा नहीं पाए. उन्होंने कोर्ट से समय देने की मांग की. जजों ने इससे मना करते हुए कहा कि फैसले में ऐसी की बात है ही नहीं. याचिका खारिज होने की आशं’का को भां’पते हुए वकील एम एल शर्मा ने कहा, “मेरी याचिका में 2 और अहम बिंदु उठाए गए हैं.” इस पर चीफ जस्टिस ने कहा, “हमने आपकी याचिका को पूरा पढ़ लिया है. हम इसे खारिज कर रहे हैं.”

गौरतलब है कि सं’विधान के अनुच्छेद 324 के तहत चु’नाव प्रक्रिया पर फैसला लेना चु’नाव आयोग के तहत आता है. आयोग को चु’नाव प्रक्रिया पर फैसला लेने, उसकी नि’गरानी करने उस पर नियंत्रण रखने का अधिकार दिया गया है. इसी के तहत आयोग किसी क्षेत्र में सुरक्षा और दूसरी परिस्थितियों का आकलन करते हुए चु’नाव की अवधि समेत दूसरे निर्णय लेता है. लेकिन याचिकाकर्ता का कहना था कि आयोग को यह शक्ति हासिल नहीं है कि वह अलग-अलग राज्यों में चु’नाव प्रक्रिया की अवधि अलग-अलग रखे.