कोरोना वायरस: भारत में मिला ‘डबल म्यूटेंट’ वेरिएंट क्या है?

मंत्रालय ने बताया है कि देश के 18 राज्यों में कई ‘वेरिएंट ऑफ़ कंसर्न्स’ (VOCs) पाए गए हैं. इसका अर्थ है कि देश के कई हिस्सों में कोरोना वायरस के अलग-अलग प्रकार पाए गए हैं जो स्वास्थ्य पर हानिकारक असर डा’ल सकते हैं.

इनमें ब्रिटेन, दक्षिण अफ़्रीका, ब्राज़ील के साथ-साथ भारत में पाया गया नया ‘डबल म्यूटेंट’ वेरिएंट भी शामिल है.

डबल म्यूटेंट वेरिएंट का कैसे पता चला?

इंडियन सार्स-सीओवी-2 कंसोर्टियम ऑन जेनोमिक्स (INSACOG) स्वास्थ्य मंत्रालय के तहत बनाई गई 10 राष्ट्रीय लेबोरेट्री का समूह है जो देश में अलग-अलग हिस्सों से आए सैंपल की जीनोमिक सीक्वेंसिंग का पता लगाती है.

जीनोमिक सीक्वेंसिंग किसी जीव के पूरे जेनेटिक कोड का ख़ाका तैयार करने की एक टेस्टिंग प्रक्रिया है. INSACOG का गठन 25 दिसंबर 2020 को किया गया था जो जीनोमिक सीक्वेंसिंग के साथ-साथ कोविड-19 वायरस के फैलने और जीनोमिक वेरिएंट के महामा’री विज्ञान के रुझान पर अध्ययन करता है.स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी है कि INSACOG ने विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 10,787 पॉज़िटिव सैंपल इकट्ठा किए थे जिसमें 771 VOCs पाए गए.इसमें बताया गया कि इन 771 में से 736 पॉज़िटिव सैंपल यूके वेरिएंट, 34 सैंपल दक्षिण अफ़्रीका वेरिएंट और 1 सैंपल ब्राज़ील वेरिएंट का था.

लेकिन जिस नए वेरिएंट की ख़ासी चर्चा शुरू हो गई है उसे ‘डबल म्यूटेंट’ वेरिएंट बताया जा रहा है. हालांकि, स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ़ कर दिया है कि इस डबल म्यूटेंट वेरिएंट के कारण देश में सं’क्रमण के मा’मलों में उछाल नहीं दिखता है.मंत्रालय ने बताया है कि इस स्थिति को समझने के लिए जीनोमिक सीक्वेंसिंग और एपिडेमियोलॉजिकल (महामारी विज्ञान) स्टडीज़ जारी है.

कहां पर मिला डबल म्यूटेंट वेरिएंट?

स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि पश्चिमी महाराष्ट्र से इकट्ठा किए गए सैंपल में से 15-20 फ़ीसदी सैंपल्स में डबल म्यूटेंट वेरिएंट पाए गए हैं.मंत्रालय ने बयान में कहा है, “दिसंबर 2020 की तुलना में महाराष्ट्र के हालिया सैंपल का विश्लेषण करने के बाद पता चला है कि यहां पर E484Q और L452R म्यूटेशन के सैंपल्स के कुछ हिस्सों में तेज़ी से बढ़ोतरी देखी गई है.”

इसके साथ ही मंत्रालय ने बताया है कि इस तरह के म्यूटेशन संक्रामक हैं और प्रतिरक्षा तंत्र पर हम’ला करते हैं.”15-20 फ़ीसदी सैंपल में यह पाए गए हैं और पिछले किसी VOCs से इनका मिलान नहीं हुआ है.””इनको VOCs की सूची में ही रखा गया है और इसके लिए उसी प्रकार के महामारी विज्ञान और सार्वजनिक स्वास्थ्य की प्रतिक्रिया की ज़रूरत है जिसमें ‘टेस्टिंग बढ़ाने, नज़दीकी लोगों को ट्रैक करने, पॉज़िटिव मा’मलों को आइसोलेट करने और नेशनल ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल के तहत इलाज करना चाहिए.”

क्या होता है डबल म्यूटेंट वेरिएंट?

विभिन्न प्रकार के वायरस के जीनोमिक वेरिएंट में बदला’व होना आम बात है और यह हर देश में पाए जाते हैं.भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के पूर्व वैज्ञानिक डॉक्टर रमन गंगाखेडकर ने बीबीसी हिंदी से कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी बयान से साफ़ नहीं है कि वह किस तरह के डबल म्यूटेंट की बात कर रहे हैं.उन्होंने कहा, “स्वास्थ्य मंत्रालय ने E484Q और L452R म्यूटेशन के बारे में बताया है लेकिन यह साफ़ नहीं है कि वह इन दोनों म्यूटेशन में दोबारा म्यूटेशन की बात कर रहे हैं या फिर इन दोनों वायरस के एकसाथ मिलकर उसमें तब्दीली होने की बात कर रहे हैं.”

“हालांकि, इन दोनों वेरिएंट के बारे में रिसर्च होनी बाकी है क्योंकि इसका कितना असर होगा और यह कितना ख़’तरना है यह कहा नहीं जा सकता है. L452R म्यूटेंट पहली बार अमेरिका के कैलिफ़ॉर्निया में पाया गया जिसके बाद यह पूरी दुनिया में फैला. इसका मतलब है कि इस म्यूटेंट में कुछ असर है जो ब’दल रहा है. अमेरिका में एक चिड़ियाघर के गोरिल्ला में यह वायरस पाया गया था. लेकिन इसका सकारात्मक रूप भी देखना चाहिए. कैलिफ़ॉर्निया में इसका प्रभाव ख़’त्म हो रहा है. लोग अगर कोविड-19 अप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते हैं तो इसका ख़’तरा कम है.”