‘तू लोहार की बेटी है सपने देखना छोड़ दे’ कहकर ताना मारते थे लोग, आज बन गयी है डॉक्टर….!

सपने उसी के पूरे होते हैं जो इन्हें देखने की हिम्मत रखता है। यदि आप बड़े सपनों के बारे में सोचोगे ही नहीं तो उस दिशा में कोई कदम भी नहीं उठाओगे। सपने पूरे करने का हक सभी को होता है।

समाज आपको कितने भी ताने मारे, लोग आपको कितना भी डीमोटिवेट करे, लेकिन आपको अपने सपनों को पूरा करने का प्रयास कभी नहीं छोड़ना चाहिए। इसका जीता जागता उदाहरण है लोहार की बेटी फरहत असगर।


उत्तर प्रदेश के बरेली के अली अहमद का तालाब इलाके में रहने वाली फरहत असगर एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखती है। उनके पिता मोहम्मद असगर एक लोहार हुआ करते थे। फरहत बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहती थी।

हालांकि अपने परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए उसने ये सपना मन में ही दबाकर रखा था। उसके मन में अक्सर ये विचार आते थे कि यदि मैं अपने इस सपने के बारे में सबको बता दूं तो क्या होगा? लोग क्या कहेंगे?

दरअसल फरहत जब भी बाहरी लोगों से अपने सपनों का जिक्र करती थी तो वे उसे यह कहकर चुप करा देते थे कि ‘एमबीबीएस की पढ़ाई पैसे वालों की है, इसका खर्च उठाना तुम्हारे पिता के लिए संभव नहीं है।’

हालांकि लोगों के मना करने के बावजूद फरहत ने सपने देखना नहीं छोड़ा। वह मेहनत करती रही। फिर उन्होंने दसवीं और बारहवीं में स्कूल में टाप कर दिया। इससे उनके सपनों को और पंख मिल गए। एक हिम्मत आई कि वह कुछ कर सकती है।


फरहत ने तीन साल कड़ी मेहनत की और अच्छी तैयारी करने के बाद उनका गोरखपुर एम्स में एमबीबीएस की सीट के लिए सिलेक्शन हो गया। अब उनका सपना है कि वह डॉक्टर बन समाज की सेवा करें। इसके लिए वे गोरखपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स में पूरे मन के साथ एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं।

फरहत अपनी सफलता का सारा श्रेय अपने लोहार पिता मोहम्मद असगर को देती है। वह कहती हैं कि मैं आज जहाँ भी हूं अपने पिता की बदौलत ही हूं। वे भले मेरी फीस का इंतजाम न कर पाते हों, लेकिन हमेशा मेरी पढ़ाई से जुड़ी कुछ न कुछ सामग्री जरूर लेकर आते रहते थे।

पिता की मेहनत और विश्वास ने मेरा हौसला बढ़ाया। इसके बाद मैंने और मन लगाकर पढ़ाई की, खूब मेहनत की, अपना 100 प्रतिशत दिया। जहां कोचिंग भी की, वहाँ अपने दिमाग और बाल पर स्कालरशिप प्राप्त की। इससे एमबीबीएस की पढाई का खर्च भी कम हुआ।

फरहत का डॉक्टर बनने का सपना तो अब जल्द ही पूरा हो जाएगा। लेकिन उन्होंने अब एक और नया सपना भी देख लिया है। उनका सपना है कि वे अपने पिता के नाम से अस्पताल और कोचिंग खोले।

यहां वे उन लोगों को सुविधाएं देना चाहेंगी जो महंगे खर्चे के डर से बड़े अस्पताल और कोचिंग करने से पीछे हट जाते हैं। इस नए अस्पताल और कोचिंग में लोग अपनी सहूलियत के हिसाब से ही फीस देकर इलाज या पढ़ाई कर पाएंगे।

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