भारत-ची’न तना’व के बीच चाइनीज सेंट्रल बैंक ने खरीदी इन भारतीय कंपनियों में हिस्सेदारी

मुंबई. भारत और ची’न त’नाव के बीच एक बड़ी खबर आई है. ची’न के सेंट्रल बैंक (Chinese Central Bank) पीबीओसी-पीपल्स बैंक ऑफ चा’इना (PBoC- People’s Bank of China) ने एक और भारतीय कंपनी में हिस्सेदारी खरीदी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ची’न के सरकारी पीपल्स बैंक ऑफ चा’इना ने एचडीएफसी और आईसीआईसीआई बैंक के बाद अब बजाज फाइनेंस (Bajaj Finace) में निवेश किया है. बजाज फाइनेंस में ची’न के बैंक ने 1 फीसदी से कम हिस्सेदारी खरीदी है.

पीपल्स बैंक की हिस्सेदारी 1 फीसदी से कम होने की वजह से स्टॉक एक्सचेंज को इस बारे में नहीं बताया गया है. हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन तीनों कंपनियों में ची’नी सेंट्रल बैंक की हिस्सेदारी बहुत कम है कि उससे किसी तरह का खतरा नहीं हो सकता. ची’न का बैंक क्यों खरीद रहा है भारतीय कंपनियों में हिस्सेदारी? अंग्रेजी की वेबसाइट बिजनेस टुडे के मुताबिक, पीपल्स बैंक ऑफ चा’इना ने बजाज ग्रुप की कंपनी बजाज फाइनेंस (Bajaj Finace) में हिस्सेदारी खरीदी है.

हालांकि, ये हिस्सेदारी एक फीसदी से भी कम है.आपको बता दें कि यह राहुल बजाज के नेतृत्व वाली बजाज फाइनेंशियल सर्विसेज की एक सहयोगी कंपनी है. पिछले महीने पीपल्स बैंक ऑफ़ चा’इना ने देश में निजी क्षेत्र के दिग्गज आईसीआईसीआई बैंक में निवेश किया था.

खबर में बताया गया है कि पीपल्स बैंक ऑफ़ चा’इना ने इससे पहले एचडीएफसी लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर एक फीसदी से ज्यादा कर ली थी, जिस पर काफी विवाद हुआ था. बजाज फाइनेंस में निवेश के साथ ही ची’न के सरकारी बैंक ने भारत में तीसरा निवेश किया है.

अब सवाल उठता है कि क्या भारत में ची’नी कंपनियों के निवेश पर कोई रो’क नहीं है, लेकिन दोनों देशों के बीच सी’मा पर बढ़ते त’नाव की वजह से इस तरह के नि’वेश पर सवाल उठ रहे हैं? इस पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि ची’नी सेंट्रल बैंक के पहले निवेश के बाद ही केंद्र सरकार ने पड़ोसी देशों से आने वाले एफडीआई और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के नि’यम स’ख्त कर दिए.

एसकोर्ट सिक्यो’रिटी के रिसर्च हेड आसिफ इकबाल ने  बताया कि चाइ’नीज सेंट्रल बैंक के पास काफी फंड है और वह भारत जैसे देशों की वित्तीय संस्थाओं में निवेश कर अपने पोर्टफोलियो को मजबूती देना चाहता है.

बजाज फाइनेंस भारत की सबसे बड़ी गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) में से एक है. उन्होंने बताया कि बैंकिंग सेक्टर में निवेश के नियमों के हिसाब से कोई भी एक निवेशक किसी बैंक में 15 फीसदी से ज्यादा वोटिंग राइट नहीं ले सकता और 5 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी लेने के लिए रिजर्व बैंक की इजाजत लेनी होती है.

ची’न के सेंट्रल बैंक ने यह निवेश कब किया- इसकी जानकारी सामने नहीं आई है. कोरो’ना संक’ट के बीच बजाज फाइनेंस के शेयर मार्च के 4,800 रुपये से उच्चतम स्तर से गिरकर अब करीब 2,200 रुपये पर पहुंच गए हैं

1600 से ज्यादा भारतीय कंपनियों में लगे है ची’न के 7500 करोड़ रुपये-देश की 1,600 से भी अधिक भारतीय कंपनियों को अप्रैल 2016 से मार्च 2020 के दौरान ची’न से एक अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त हुआ. सरकारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई है.

सरकार से प्रश्न किया गया था कि क्या यह तथ्य है कि भारतीय कंपनियों, विशेष रूप से स्टार्ट-अप में ची’नी एजेंसियों द्वारा बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1,600 से अधिक कंपनियों ने अप्रैल 2016 से मार्च 2020 की अवधि के दौरान ची’न से 102 करोड़ 2.5 लाख डॉलर (1.02 अरब डॉलर) का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त किया.