मनमोहन सिंह द्वारा बनाए गए 1991 के ऐतिहासिक बजट पर यशवंत सिंहा ने कह डाली ये बात, मचा हंगामा

24 जुलाई 1991 को डॉ मनमोहन सिंह ने बतौर वित्त मंत्री एतिहासिक बजट पेश किया था। 1991 में दिए बजट भाषण के बाद से ही मनमोहन सिंह को नई आर्थिक नीतियों और उदारीकरण का चेहरा माना जाने लगा। इसके उलट पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा का मानना है कि मनमोहन सिंह ने वह बजट खुद नहीं तैयार किया था बल्कि उसे कहीं से कॉपी किया गया था।

चंद्रशेखर सरकार में वित्त मंत्री रहे यशवंत सिन्हा अपनी किताब में भी इस बात का जिक्र कर चुके हैं और कई मौकों पर यह कह भी चुके हैं कि मनमोहन सिंह के बजट की संरचना, उनके द्वारा तैयार अंतरिम बजट से मिलती जुलती है। यशवंत सिन्हा का मानना है कि राजनीतिक कारणों से उन्हें अपने बजट को पेश करने का मौका नहीं मिला था।

उन्होंने वित्त मंत्री रहने के दौरान लाइसेंसराज को ख’त्म करने की योजना तैयार की थी। बकौल सिन्हा, जब इसकी परिकल्पना जब मनमोहन सिंह के हाथों में आई तो उन्हें बजट तैयार करने में मदद मिली और इतिहास में उनका नाम दर्ज हो गया। उनका दा’वा है कि सिंह से पहले उन्होंने देश में क्रां’तिकारी बदलाव लाने की तैयारी कर ली थी।

यशवंत सिन्हा अपना दा’वा पुख्ता करने के लिए कई कांग्रेस नेताओं का हवाला भी देते हैं। यशवंत सिन्हा के अनुसार उनके अं’तरिम बजट और मनमोहन सिंह के पूर्ण बजट के कुछ पैराग्राफ एक जैसे हैं। वह बताते हैं कि जिस टीम के साथ वह बजट तैयार कर रहे थे, उसी टीम ने ही मनमोहन सिंह का बजट तैयार किया था। सिन्हा कुछ अधिकारियों के नाम भी गिनाते हैं जो उनके और मनमोहन सिंह के साथ काम कर चुके हैं।

वह कांग्रेस नेता अर्जुन सेनगुप्ता के बयान का हवाला देते हुए कहते हैं कि इससे साफ हो जाता है कि मनमोहन सिंह का बजट उनके बजट से प्रेरित था। सिन्हा के अनुसार जब मैंने 1998 में अटल बिहारी सरकार के दौरान बजट पेश किया था तो अर्जुन सेनगुप्ता ने कहा था कि 1991 में यशवंत सिन्हा जिस बजट पर काम कर रहे थे वह बहुत सुधारवादी था, अगर वह बजट आ गया होता तो यशवंत आज बड़े सुधारवादी माने जाते, लेकिन यशवंत इस बजट में वैसी हिम्मत नहीं दिखा पाए।

यशवंत सिन्हा 10 नवंबर 1990 से लेकर 21 जून 1991 तक चंद्रशेखर सरकार में वित्त मंत्री के पद पर काबिज रहे थे। 1991 में जब सियासी उठापटक के बाद नरसिम्हा राव की सरकार बनी तो देश के सामने आर्थिक संकट खड़ा था। इन संकटों को देखते हुए बजट तैयार करने की जिम्मेदारी मनमोहन सिंह को दी गई थी। इसी बजट में देश से लाइसेंस राज को खत्म कर दिया गया था। भारतीय अर्थव्यवस्था में इम्पोर्ट- एक्सपोर्ट पॉलिसी में बदलाव कर भारतीय अर्थव्यवस्था को दुनिया के लिए खोल दिया था।