यूपी में एक साल में दुगनी हुई बेरोज़गारी दर, सरकारी रि!पोर्ट में खुली ये पोल

कोरोनावायरस के बढ़ते के!स और हाथरस-बलरामपुर में द!लित महिलाओं से हुई ब!र्बरता के मा!मलों में घि!री उत्तर प्रदेश सरकार के लिए मु!श्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। राज्य के श्रम मंत्रालय ने बेरोजगारी से जुड़े कुछ आंकड़े सामने रखे हैं।

इसमें सामने आया है कि 2018 के मु!काबले उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी लगभग दोगुनी हो गई। यूपी सरकार की ओर से यह आंकड़े कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अजय कुमार लल्लू की ओर से विधानसभा में किए गए सवालों के जवाब में जारी किए गए हैं। अब इन्हें लेकर विपक्ष की ओर से हं!गामा किए जाने की संभावना है।

उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्रालय ने जो रिपोर्ट सामने रखी है, उसमें आर्थिक गतिविधियों पर नजर रखने वाली संस्था सेंटर फॉर मॉनिटरिंग ऑफ इकोनॉमिक एक्टिविटी (CMIE) का सर्वे है। इसके मुताबिक, यूपी में 2018 में बेरोजगारी दर 5.92 फीसदी थी। 2019 में यह दर बढ़कर 9.97% पर पहुंच गई।

यानी अगर तुलना की जाए, तो राज्य में एक साल में ही बेरोजगारी दर लगभग दोगुनी हो गई। यह आंकड़े काफी चौं!काने वाले हैं, क्योंकि 2019 में कोरोना महामा!री जैसी कोई समस्या भी नहीं थी।

यूपी में अप्रैल तक 21 फीसदी के ऊपर पहुंच गई थी बेरोजगारी दर: ‘द हिंदू’ अखबार ने हाल ही में CMIE की रिपोर्ट का जिक्र करते हुए बताया था कि इस साल अप्रैल के अं!त तक लॉकडाउन लगने की वजह से देश में बे!रोजगारी दर तेजी से बढ़ी थी।

पुडुचेरी में बेरोजगारी दर सबसे ज्यादा 75.8 फीसदी पर थी। इसके अलावा तमिलनाडु में 49.8 फीसदी, झारखंड में 47.1 फीसदी, बिहार में 46.6 फीसदी, हरियाणा में 43.2% कर्नाटक में में 29.8% और उत्तर प्रदेश में यह दर 21.5 फीसदी पहुंच गई थी।

माना जा रहा है कि कोरोनाकाल में राज्य में लाखों लोगों की नौकरियां गई हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग दूसरे राज्यों में काम खोने के बाद यूपी लौटे भी हैं। इसी के चलते 2020 में बेरोजगारी दर और ज्यादा बढ़ चुकी है।

बता दें कि देशभर में कोरोना के ड!र से मार्च में ही लॉकडाउन लगा दिया गया था। केंद्र और राज्य सरकारें अब धीरे-धीरे अलग-अलग व्यवस्थाओं को शुरू कर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश में जुटी हैं। साथ ही यूपी सरकार रोजगार पै!दा करने की कोशिश में भी जुटी है।